उत्तराखंड की महिलाओं को आरक्षण पर हरियाणा की महिलाओं को आपत्ति, कोर्ट पहुंची

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उत्तराखंड में राज्य लोक सेवा आयोग के जरिए उत्तराखंड सम्मिलित सिविल अधिनस्थ सेवा परीक्षा में उत्तराखंड की महिलाओं को अनारक्षित श्रेणी में 30 फीसदी का आरक्षण देने के नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। ये चुनौती हरियाणा की एक महिला और कुछ अन्य अभ्यर्थियों ने दी है।

दरअसल आयोग ने पिछले साल दस अगस्त को एक विज्ञापन जारी किया था। परीक्षा हुई और 26 मई 2022 को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आया। परीक्षा में अनारक्षित श्रेणी की दो कट ऑफ लिस्ट निकाली गईं हैं। उत्तराखंड मूल की महिला अभ्यर्थियों की कट ऑफ 79 है। जिन महिलाओं ने याचिका दायर की है उनके मुताबिक उनके नंबर 79 से अधिक हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हे अयोग्य करार दिया गया।

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याचिकाकर्ता ने जो दलील दी है उसमें अदालत को बताया है कि शासनादेश के अनुसार, उत्तराखंड मूल की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है, जो असंवैधानिक है। आवास के आधार पर राज्य आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

दैनिक हिंदुस्तान की एक खबर बताती है कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने कोर्ट को बताया है कि 18 जुलाई 2001 और 24 जुलाई 2006 के शासनादेश के अनुसार, उत्तराखंड मूल की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है, जो असंवैधानिक है।

संविधान के अनुच्छेद-16 के अनुसार आवास के आधार पर कोई राज्य आरक्षण नहीं दे सकता, यह अधिकार केवल संसद को है। राज्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर व पिछले तबके को आरक्षण दे सकता है। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद राज्य सरकार व राज्य लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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