‘जीरो टाॅलरेंस’ पर विधायक की आवाज क्यों दबाना चाहता है BJP संगठन ?

puran singh fartyal

 

देहरादून : भाजपा के लोहाघाट से विधायक पूरन सिंह फर्त्याल इन दिनों राज्य की सियासी चौपालों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला तो भाजपा संगठन ने उनको नोटिस थमा दिया। विधायक को नोटिस देने के बाद अब संगठन ही सवालों के घेरे में आ गया है। पार्टी के भीतर से ही पार्टी पर सवाल दागे जा रहे हैं। विधायक ने विधानसभा में नियम-58 के तहत सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का मामला उठाया था, जिसे भाजपा संगठन ने अनुशासनहीतना करार देते हुए विधायक को नोटिस देकर उनसे जवाब तलब कर लिया। अब कार्रवाई की भी तैयारी भी की जा रही है।

विधायक ने अपनी ही सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर मोर्चा खोला हुआ है। यहां तक भाजपा संगठन उन पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। इसी बात को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब पहले भी इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं, तो फिर विधायक पूरन सिंह फर्त्याल को ही नोटिस क्यों ? लेकिन, ऐसा पहली बार हुआ कि सत्ता दल की ओर से विधायक को नोटिस जारी किया गया हो। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में ही भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने 2017 में, आदेश चैहान ने 2018 में जबकि पूरन सिंह फर्त्याल ने ही 2017 में एक बार 2018 में दो बार और 2020 में एक बार नियम-58 के तहत सवाल लगाया। लेकिन, सरकार के खिलाफ सवाल लगाने के लिए संगठन ने पहली बार विधायक को नोटिस जारी किया।

ये बात और है कि जब पहले विधायकों ने नियम-58 के तहत सवाल उठाए तब भाजपा संगठन के अध्यक्ष अध्यक्ष भट्ट थे, लेकिन बंशीधर भगत के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद एक बार ही भाजपा विधायक ने सवाल लगाया और संगठन ने विधायक को नोटिस जारी कर जवाब मांग दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का कहना है कि हो सकता है कि पहले नियम-58 के तहत सवाल लगाने पर विधायकों को नोटिस इसलिए जारी न किए गए हों कि विधायकों ने सवाल लगाने के साथ मीडिया में अपनी बात को सार्वजनिक ना किया हो। उन्होंने कहा कि इस बार मामला कुछ और है। क्योंकि विधायक के द्वारा मामला सदन में उठाने के साथ लगातार मीडिया में बयानबाजी की जा रही है। इसलिए विधायक को नोटिस जारी किया गया है।

भाजपा विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने टनकपुर-जौलजीवी मोटर मार्ग के टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किए जाने का मामला कांग्रेस सरकार से लगातर उठा रहे हैं। लेकिन, अपनी ही सरकार में भी जिस तरह अब विधायक की आवाज हो दबाने के लिए भाजपा संगठन उन पर कार्रवाई करने की तैयारी में नजर आ रहा है। उससे लगाता है कि भाजपा जिस जीरो टाॅलरेंस की बात पिछले साढ़े तीन साल से करती आई है। उससे हटके भ्रष्टाचार के मामले पर विधायक की आवाज को दबाना चाहती है। ताकि विधायक भ्रष्टाचार के मामले पर आवाज न उठाएं।

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