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MSP क्या है? किन फसलों में होती है लागू? क्या है किसानों की मांग? जानें यहां

पंजाब के हजारों किसान विरोध प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। हालांकि उनको बॉर्डरों पर ही रोकने के पूरे इंतजाम किए गए हैं। ये विरोध प्रदर्शन न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर हो रहा है। किसान एमएसपी के साथ ही स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, लखीमपुर खीरपी हादसे पर सख्त कार्रवाई करने जैसी कई अन्य मांगों पर भी अड़ें हैं।

क्या होती है MSP?

न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी किसानों को दी जाने वाले एक गारंटी की तरह होती है, जिसमें तय किया जाता है कि बाजार में किसानों की फसल किस दाम पर बिकेगी। दरअसल, फसल की बुआई के दौरान ही फसलों की कीमत तय कर दी जाती है और यह तय कीमत से कम में बाजारों में नहीं बिकती है। एमएसपी तय होने के बाद बाजार में फसलों की कीमत गिरने के बाद भी सरकार किसानों को तय कीमत पर ही फसलें खरीदती है।

बता दें कि एमएसपी वह निश्चित मूल्य है जिस पर केंद्र और राज्य सरकारें और उनकी एजेंसियों किसानों से खाघान्न खरीदती हैं। यह खरीदी केंद्रीय पूल के तहत की जाती है जिसका उपयोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत खाघान्न मुहैया कराने के लिए किया जाता है। इसके अलावा खाघान्न को बफर स्टॉक के रुप में आरक्षित भी रखा जाता है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में किसानों को सभी प्रकार की फसलों पर एमएसपी की गारंटी देने की मांग की जाती रही है।

किन फसलों में लागू होती है MSP?

बता दें कि केंद्र सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर हर साल खरीफ और रबी सीजन से पहले 24 फसलों के लिए एमएसपी अधिसूचित करती है। इन फसलों मं अनाज, मोटे अनाज और दालें जैसे खाघान्न शामिल हैं। हलांकि, सरकारी खरीद काफी हद तक कुछ खाघान्न जैसे धान, गेहूं और कुछ हद तक दालों तक ही सीमित है। इनमें सबसे ज्यादा खरीद चावल और गेहू की होती है।

14 खरीफ और 10 रबी फसलों पर MSP

14 खरीफ फसलों के लिए एमएसपी होती है। ये फसलें धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सूरजमुखी के बीच, सोयाबीन, तिल, नाइजरसीड और कपास। वहीं 10 रबी फसलों के लिए एमएसपी दी जाती है। ये फसलें हैं गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों, कुसुममम, टोरिया और अन्य फसलें, कोपरा, भूसी रहित नारियल और जूट।

खाघान्नों की खरीद बड़े पैमाने पर कुछ राज्यों में केंद्रित है। देश में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन करने वाले तीन राज्य मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा इसकी ज्यादातर खरीद करते हैं। वहीं चावल का उत्पादन करने वाले छह बड़े राज्यों में पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और हरियाणा की खरीग में ज्यादातर हिस्सेदारी होती है।

पंजाब से दिल्ली कूच कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों की मांग है कि केंद्र न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी की गारंटी वाला कानून लाए। दिल्ली कूच से पहले 12 फरवरी को किसानों और केंद्रीय मंत्रियों के बीच बैठक हुई लेकिन इसमें एमएसपी जैसी मांगों पर सहमति नहीं बन पाई।   

कौन तय करता है फसलों की MSP?

केंद्र सरकार फसलों पर एमएसपी दर लागू करती है और राज्य सरकारों के पास भी एमएसपी लागू करने का अधिकार है। केंद्र सरकार ने किसानों की फसलों को उचित कीमत दिए जाने के उद्देश्य से साल 1965 में कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी CACP का गठन किया था। यह हर साल रबी और खरीफ फसलों के लिए MSP करती है। पहली बार 1966-67 में एमएसपी दर लागू की गई थी। CACP के द्वारा की जाने वाली सिफारिशों के आधार पर ही सरकार हर साल 23 फसलों के लिए एमएसपी का ऐलान करती है।

क्या है किसानों की मांग?

किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानूनी गारंटी के अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों व कृषि मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि श्रण माफ करने, पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने, लखीमपुरी खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 बहाल करने और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं।  

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