highlightNainital

उत्तराखंड: इस पुल में ऐसा क्या है कि टेंडर नहीं लेना चाहते ठेकेदार, फंस गया काम

cabinet minister uttarakhand

 

हल्द्वानी: महंगाई से हर कोई परेशान है। केवल पेट्रोल-डीजल ही महंगा नहीं हुआ। खाने-पीने की चीजें भी महंगी हुई। लेकिन, एक और क्षेत्र महंगाई से बहुत प्रभावित हुआ है। इस क्षेत्र में लोगों पर महंगाई की मार पड़ी है। यह क्षेत्र निर्माण का क्षेत्र है, जहां महंगाई चरम पर है। निर्माण सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जिसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

हल्द्वानी को पहाड़ से जोडऩे वाले कलसिया पुल के निर्माण पर संकट आ गया है। पुल के टेंडर खोले गए थे। लेकिन, एक भी ठेकेदार ने हिस्सा नहीं लिया। पिछले 9 माह के माह भीतर तीसरी बार टेंडर हुआ था। पहले टेंडर में ठेकेदार मिला गया था। लेकिन बजट विवाद की वजह से उसने काम नहीं किया। दूसरे और तीसरे टेंडर में किसी ने हिस्सा ही नहीं लिया।

काठगोदाम चौकी से पहले कलसिया नाले के ऊपर दो पुल बने हैं। जिनसे अप और डाउन का ट्रैफिक पास होता है। जिस पुल से गाडिय़ां पहाड़ से नीचे को उतरती थी। उसके कमजोर होने पर पिछले अगस्त में एनएच ने टेंडर करा ठेकेदार का चयन कर लिया था। तब 2.34 करोड़ रुपये में टेंडर छूटा था। लेकिन सात महीने बाद काम शुरू करने के आदेश जारी गए। जिस पर ठेकेदार ने बगैर पैसे बढ़ाए काम करने से साफ मना कर दिया।

जिसके बाद अधीक्षण अभियंता के दफ्तर से पुराने टेंडर को रद्द कर 28 मार्च को नया टेंडर निकाला गया। मगर किसी भी हिस्सा ही नहीं लिया। जिसके बाद 18 अप्रैल को नई तारीख तय हुई। लेकिन सोमवार को भी पुल निर्माण के लिए एक भी टेंडर नहीं पड़ा। ईई संजीव राठी ने इसकी पुष्टि की है। वहीं, अब फिर से टेंडर की तारीख तय की जाएगी।

कलसिया नाले के ऊपर 24 मीटर लंबा पुल बनना है। नाले के तल से इसके पिलर उठेंगे। बरसात के दिनों में नींव का काम कराना दिक्कत खड़ी कर सकता है। एनएच के सहायक अभियंता एमबी थापा ने बताया कि निर्माणदायी संस्था के मिलने के बाद पुल के पूरी तरह तैयार होने में एक साल का वक्त लग जाएगा। फिलहाल अस्थायी बैली ब्रिज से काम चलाया जा रहा है।

पुराने ठेकेदार ने फरवरी में काम करने से इसलिए हाथ पीछे खींच लिए थे। क्योंकि, निर्माण सामग्री और मजदूरों की दर बढ़ गई थी। इसके अलावा हाईवे का पुल होने के कारण काम को लेकर ठेकेदार पर दबाव भी रहेगा। हालांकि, एनएच का कहना है कि पुराने रेट से ज्यादा का टेंडर पडऩे पर उसे सीधा निरस्त नहीं किया जाता। बल्कि दरों का बाजार मूल्य से परीक्षण कराया जाता। उसके बाद ही फैसला होना था।

Back to top button