प्रमुख वन संरक्षक के बचाव में दर्जाधारी वीरेंद्र बिष्ट, हरक की खिलाफत

देहरादून: उत्तराखंड में जंगल धूं-धूं कर जल रहे हैं। वन विभाग के मुखिया विदेश दौरे पर हैं। वनों की आग बुझाने के लिए वन विभाग सरकार से हेलीकाॅप्टर मांग रहा है, लेकिन सरकार उस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इतना ही नहीं सरकार के दर्जाधारी उत्तराखंड वन पंचायत समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र बिष्ट पार्टी प्रवक्ता की तरह प्रमुख वन संरक्षक के बचाव में उतर आए हैें। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वनों को लेकर सरकार और सरकार के अधिकारी कितने संवेदनशील हैं।

सरकार में वन विभाग में वन पंचायत समिति एक अहम कड़ी है। उसकी जिम्मेदारी जिन पर है। उनको नहीं लगाता कि वन विभाग के मुखिया के विदेश जाने से वनों को आग से नुकसान हो रहा है। हर कोई प्रमुख वन संरक्षक के विदेश दौरे और उसके लिए वन मंत्री की अनुमति नहीं लेने पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं, सरकार के दर्जाधारी उसके बचाव में खड़े नजर आ रहे हैं। इससे यह बात भी साफ है कि सरकार अधिकारियों को पूरा संरक्षण दे रही है।

वीरेंद्र बिष्ट के बयान को सुनने से लगता है कि प्रमुख वन संरक्षक ने उनसे बात की है। अपने बयान में कह रहे हैं कि प्रमुख वन संरक्षक लगातार अधिकारियों के संपर्क में हैं। वो लगातार बात कर रहे हैं। उनकी नजर उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग पर बनी हुई है। क्या सच में ऐसा हो रहा होगा, यह एक बड़ा सवाल है ?

वन विभाग में दर्जाधारी वीरेंद्र बिष्ट ने अपने ही विभाग के मंत्री हरक सिंह रावत की खिलाफत कर दी है। सवाल ये उठ रहा है कि ऐसा क्या है जो वन मंत्री हरक सिंह के सरकार और नौकरशाही पर उठाए सवालों को लेकर सरकार क्यों डिफेंसिव नजर आ रही है। सरकार को अधिकारियों को लेकर सख्ती बरती जानी चाहिए थी, लेकिन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के फाइलों पर साइन करने के फैसले को सही ठहराया। अब वन विभाग में ही वन पंचायत समिति के अध्यक्ष भी प्रमुख वन संरक्षक के पक्ष में खुलकर उतर आए हैं। इससे सरकार पर सवाल उठ रहे हैं।

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