शहीद की बेटी बोली- राजनीति में सेनाओं को घसीटना अपमान, मेरे पिता मोदी-राहुल के लिए शहीद नहीं हुए

14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले को भला कोई कैसे भूल सकता है…देश ने एक साथ 42 जवानों को खोया…वहीं इस दिन देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोग सकते में आ गए थे और इस हमले की कई देशों ने निंदा की थी.

मेरे पिता मोदी-राहुल के लिए शहीद नहीं हुए-अपूर्वा

वहीं सोशल मीडिया पर पुलवामा हमले मेंं शहीद जवान कौशल कुमार रावत की बेटी का एक वीडियो वायरल हो रहा है जो की एक कार्यक्रम का है…जनसत्ता में छपी खबर के अनुसार शहीद की बेटी ने जवानों को राजनीति में घसीटना उनका अपमान बताया। इस दौरान शहीद की पत्नी की आंखों में आंसू आ गए. शहदी की बेटी अपूर्वा रावत ने कहा कि मेरे पिता मोदी या राहुल के लिए शहीद नहीं हुए। वे भारत के लिए शहीद हुए। क्या आप सैनिकों को घसीटे बिना चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। एक बार चुनाव हो जाने पर आप हमें भूल जाएंगे। यह बात हमें अच्छी तरह से मालूम है.

आप उन लोगों पर ध्यान केंद्रित क्यों नहीं करते हैं जिनकी वजह से हमारे जवान शहीद हो रहे हैं-अपूर्वा

इस दौरान शहीद की पत्नी ममता रावत ने कहा कि सेना को राजनीति में नहीं लाना चाहिए। हम नहीं चाहते कि नेता हमारे घर आएं। आप उन लोगों पर ध्यान केंद्रित क्यों नहीं करते हैं जिनकी वजह से हमारे जवान शहीद हो रहे हैं। आज भाजपा की सरकार है तो ‘मोदी की सेना’। यदि कल को कांग्रेस की सरकार बनती है तो यह ‘राहुल की सेना’ हो जाएगी! भारत की सेना भारत के लोगों के लिए काम कर रही है।

देश के पीएम मोदी हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि सेना उनकी है- शहीद की बेटी

शहीद की बेटी ने कहा कि मोदी जी भी भारतीय हैं और योगी जी भी। अपूर्वा ने कहा की देश के पीएम मोदी हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि सेना उनकी है. हमें राजनीति को लेकर अपनी सेना की आलोचना नहीं करनी चाहिए। यदि शहीद जवान जैसे उनके पिता या मेजर विभूति इस चीज को देख रहे होंते तो वे यह कहते कि मैंने अपनी शहादत इन लोगों के लिए नहीं दी। यदि ऐसा रहता, तो वे कभी अपनी जिंदगी कुर्बान नहीं करते। वे अपनी नौकरी से इस्तीफा दे देते और वापस घर लौट आते। परिवार के साथ रहते और इन चीजों को देखते। यदि आप सेना को राजनीति में घसीटते हैं तो पूरी तरह से उनका अपमान कर रहे हैं।

अपूर्वा ने कहा कि भारतीय सेना ‘भारतीय सेना’ है। घटना के 13 दिनों तक सभी पार्टी के नेता हमारे घर आते रहे। सभी ने सहानुभूति जताई। सभी ने मदद करने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बाद मेरा फोन तक नहीं उठाने लगे।

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