Video उत्तराखंड : शहीद की पत्नी ने पीएम मोदी को बताया भगवान का अवतार, कहा…

देहरादून। उत्तराखंड वीरों की भूमि है और उत्तराखंड की कई जवान देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का न्यौछावर कर गए. पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ 40 जवान शहीद हुए जिनमें से दो लाल उत्तराखंड के भी थे. वहीं इसके बाद फिर जम्मू कश्मीर में आतंकियों से मुठभेड़ औऱ बम डिफ्यूज करते हुए दो अलग-अलग जगह दो मेजर जो की उत्तराखंड निवासी थे…शहीद हो गए। पुलवामा हमले का बदला भारतीय वायुसेना के द्धारा लिया गया और भारतीय वायुसेना के जवानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आंतकी कैंपों को तबाह किया जिसके बाद 300 से ज्यादा आतंकियों को मारे जाने की खबर सामने आई.

भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव पर देश की सियासत भी गर्म हो चुकी है…भाजपा जहां ऐयर सर्जिकल स्ट्राइक करने को मजबूत नेतृत्व क्षमता करार दे रही है और लोकसभा चुनाव में इसका फायदा उठाना चाहती है.

शहीदों के परिजन की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अलग-अलग राय 

वहीं विपक्षी दल इससे घबराएं हुए है और वायुसेना के द्धारा की गई स्ट्राईक के सबूत सरकार से मांगे जा रहे हैं। सियासत का केंद्र इन दिनों एयर सर्जिकल स्ट्राइक बन चुकी है। वहीं सियासत के परे शहीदों के परिजन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अलग-अलग राय दे रहे हैं।

मोदी देश की सुरक्षा के लिए भगवान है

कारगिल युद्ध में अपने पति को खो चुकी शहीद शबाब सिंह की पत्नी का कहना है कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण जैसी हो तो देश की तरक्की निश्चित है. साथ ही शहीद की पत्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना भगवान से करते हुए कहा कि देश की रक्षा सुरक्षित हाथों में है, जिस तरह पुलावामा हमले का बदला भारतीय सेना ने लिया है…उससे ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री देश के भगवान हैं और देश की रक्षा भगवान के हाथ में है,भारत की शक्ति से पाकिस्तान भी घबराया हुआ है। ऐयर सर्जिकल स्ट्राइक से उनके कलेजे में ठंडक पड़ी है और उस दिन से उन्हे अच्छी नींद भी आ रही है, इसलिए वह चाहती है कि देश की रक्षा ऐसे ही हाथों में रहनी चाहिए। शहीद शबाब सिंह की पत्नी ने ये प्रतिक्रिया रक्षा मंत्री के द्धारा सम्मानित किए जाने के बाद दी है.

आप को बता दें की मसूरी विधायक गणेश जोशी के द्धारा शौर्य सम्मान कार्यक्रम का आयोजन कि गया था,जिसमें 15 शहीद के परिजनों को रक्षा मंत्री ने सम्मान करने के साथ सभी शहीदों की पत्नियों के पांव भी छुएं।

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