
पिथौरागढ़ जिले में भारी बारिश के चलते कई मकान, रास्ते और पुल ध्वस्त हो गए। लोगों की जान पर बन आई। जानवर भी पानी की तेज धारमें बह गए। पिथौरागढ़ चमोली में हालात खराब है। आपदा के कारण लोग कई दिनों से बिन खाए पिए हैं। नींद हराम हो रखी है। उत्तराखंड में पिथौरागढ़ जिले के बरम, मेलती, धारचूला समेत कई गांव में बरसात का पानी घुस गया और तबाही मचा दी। वृद्ध लोगों को कंधों पर मुश्किल से तेज बहाव वाले नाले पार करके सुरक्षित जगहों तक पहुंचाया गया। वहीं पिथौरागढ़ में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आपदा के चार दिन बाद भी प्रशासन की ओर से मदद नहीं मिलने और बरागाड़ के बहाव से खेतभराड़ को बचाने के लिए चैनेलाइज करने की मांग पर अड़े आपदा प्रभावितों ने एसडीएम, तहसीलदार, सिंचाई विभाग के ईई और राजस्व उप निरीक्षक को बंधक बना लिया। आप वीडियो में देख सकते हैं किलोग किस खतरे में जी रहे हैं। वहीं एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीम ने लोगों को रेस्क्यू कर लकड़ी के पुलिस के सहारे पार करवाया।
आपको बता दें कि एसडीआरएफ और आईटीबीपी ने अस्थाई लकड़ी का पुल बनाकर 75 ग्रामीणों का रेस्क़यू किया। लोगों ने टीम का धन्यवाद कहा।
वहीं बात करें मगंलवार की तो मंगलवार को पिथौरागढ़ जिले में हिमालय से लगे हुए बरम, मेलती, धारचूला और कुछ अन्य गांवों में तेज बरसात और पहाड़ों से आने वाले पानी ने कहर ढहा दिया। बरसाती नालों ने रौद्र रूप धारण करते हुए घरों में प्रवेश किया। नदियों का बहाव बदलने से घरों के अंदर से पानी गुजरने लगा। पहाड़ी क्षेत्र में जारा, जिबली और मेलति गांव में बादल फटने और मकान दबने से दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई। मोरी, उपरगड़ा और सीलिंग सहित कई इलाकों में भूस्खलन ने सब कुछ तबाह कर दिया है। मोरी गांव में भी 2 बोलेरो जीप मलबे में दब गई। इस तांडव से सैकड़ों लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो गए। क्षेत्रीय विधायक हरीश धामी और प्रशासन की पहल पर सेना ने कुछ इलाको में मोर्चा संभाला है और राहत बचाव कार्य शुरू किये गए हैं। धारचूला और मुनस्यारी से जौलजीबी तक का पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया है। कई घरों में दरारें आ गई हैं। नदी नालों का जलस्तर ऊंचे पुलों को छूने को तैयार हैं।