उत्तरकाशी : विपेंद्र राणा की सूझबूझ से बची ट्रैकिंग पर गए दल की जान, 2 दिन फंसे रहे बर्फ के बीच

 

उत्तरकाशी : टिहरी के घुत्तू गंगी से मयाली पास केदारनाथ की ट्रैकिंग पर गया 7 सदस्यीय दल 2 दिन बर्फबारी के बीच फंसा रहा। इन सभी के लिए गाइड विपेंद्र राणा मसीहा साबित हुए। विपेंद्र राणी की समझदारी के कारण सभी ट्रेकर्स की जान बच गई। बता दें कि बीते दिनों में भी पोर्टर समेत एक दल लापता हो गया था जिसमे से 7 के शव बरामद कर लिए गए हैं जिसमे गाइड भी शामिल है। लेकिन विपेंद्र राणा की सूझबूझ से सभी की जान बच गई और दल सुरक्षित वापस लौट आया है। दल में बंगाल के तीन ट्रैकर शामिल थे। सुरक्षित लौटने पर उन्होंने अपने गाइड और पोर्टर का आभार व्यक्त किया।

बंगाल के तीन ट्रैकर, एक गाइड और पोर्टर का दल हुआ था रवाना

मिली जानकारी के अनुुसार बंगाल के तीन ट्रैकर, एक गाइड और तीन पोर्टर का दल 11 अक्टूबर को उत्तरकाशी की ट्रैकिंग माउंटेनियरिंग एजेंसी नार्थ हिमालय होलीडे के नेतृत्व में उत्तरकाशी से घुत्तू के लिए रवाना हुए थे। उत्तरकाशी के रैथल निवासी विपेंद्र राणा दल के गाइड थे। विपेंद्र राणा ने बताया कि गंगी से उनका दल 13 अक्टूबर को आगे बढ़ा और खतलिंग ग्लेशियर होते हुए चौकी पहुंचा। उन्होंने 16 अक्टूबर तक चौकी में आराम किया और फिर 17 अक्टूबर की सुबह मसरताल के लिए रवाना हुए।

बर्फबारी हो गई शुरु

लेकिन सुबह 11 बजे बर्फबारी शुरू हो गई। बर्फबारी के दौरान सभी मसरताल से करीब एक किलोमीटर दूर थे, लेकिन उन्होंने मौसम को देखते हुए आसपास के किसी सुरक्षित स्थान पर आपातकालीन कैंप लगाना उचित समझा। बर्फबारी के बीच ही आपातकालीन कैंप लगाया गया। उन्होंने पानी के लिए बर्फ का उपयोग किया। हर दो घंटे में टेंटों में एकत्र हो रही बर्फ को हटाया।17 और 18 अक्टूबर की रात तक गाइड समेत दल के लोग ये करते रहे। 19 अक्टूबर को मौसम साफ हुआ लेकिन बर्फबारी के कारण आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं था। ऐसे में उन्होंने अभियान को रोकने और वापस लौटने का फैसला लिया, जिससे वे सुरक्षित लौटे।

इस पर विपेंद्र राणा का कहना है कि वे पिछले दस सालों से गाइड का काम कर रहे हैं। उच्च हिमालय क्षेत्र में ट्रैकिंग के लिए जोश से महत्वपूर्ण वहां के मौसम का अनुभव होता है, जिसके आधार पर आगे बढऩे और रुकने का निर्णय लिया जाता है

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