देखिए उत्तरकाशी का डिजिटल स्कूल! ऐसे में कैसे पढ़ेगा इंडिया और आगे बढ़ेगा इंडिया

उत्तरकाशी (दीपिका रावत) : जहाँ एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार औऱ राज्य की त्रिवेंद्र सरकार शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा कर रही है ताकि हमारे प्रदेश के नौनिहाल पढ़ लिख कर एक नए भारत का निर्माण करेंगे। वहीं दूसरी ओऱ इन सभी दावों की पोल खुलती दिख रही है…उत्तराखंड में ऐसा स्कूल भी है जहां बच्चों के बैठने के लिए कक्षा तक नहीं है. स्कूल के कक्षाओं से पानी टपक रहा है जिससे बच्चे बाहर पढ़ने को मजबूर हैं. सरकार और शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते सब पढ़े सब बढ़े का सपना दूर तक साकार होता नही दिखयी दे रहा है। ताजा मामला उत्तरकाशी के ग्राम पंचायत चोपड़ा, विकास खण्ड नौगांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का है.

खबर उत्तराखंड के पाठक ने हमें उत्तरकाशी के इस स्कूल के जर्जर हालत के बारे में जानकारी दी…जिसमे हमने गंभीरता से लिया.

कड़ाके की ठंड में बच्चे बाहर बैठकर पढ़ने को मजबूर

समाज सेवक सोवत राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि विकास खण्ड नौगांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे कड़ाके की सर्दी में विद्यालय के बाहर आंगन में जहां बारिश के कारण मिट्टी भी गीली हो रखी है…पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. हालांकि बैठने के लिए दरी बिछाई गई है लेकिन भरी सर्दी में बच्चों पर ये सितम किसी अपराध से कम नहीं. जिससे यही बात जेहन में आती है कि ऐसे में कैसे पढ़ेगा इंडिया और कैसे आगे बढ़ेगा इंडिया.

समाज सेवक सोवत राणा ने खबर उत्तराखंड को दी जानकारी

समाज सेवक सोवत राणा ने बताया कि विद्यालय भवन इतना जर्जर हो रखा है कि शिक्षक कक्षा में बच्चों को बैठाने से डर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी बरसात के मौसम में होती है…जिस दौरान बच्चों को बाहर भी बैठाया नहीं जा सकता इससे उनके भविष्य से तो खिलवाड़ हो रहा है…लेकिन सरकार को बच्चे के भविष्य अंधकार की ओर जाता नहीं दिखाई दे रहा है.

विद्यालय भवन जर्जर होने के कारण स्कूल भवन में नहीं बैठाये जाते बच्चे

सोवत राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि चोपड़ा गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में करीब 30 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन विद्यालय भवन जर्जर होने के कारण विद्यालय भवन में नहीं बैठाये जाते. क्योंकि छत से भी पानी टपकता और बारिश होने पर भवन में भी पानी भर जाता है। दीवारें भी जर्जर हालात में है जिस कारण विद्यार्थियों को भवन के अंदर बिठा नहीं सकते…जोकि अध्यापक अपने ऊपर इतनी जिम्मेदारी नहीं ले सकते हैं.

स्कूल भवन का निर्माण 2008 में हुआ था, प्रार्थना के लिए नहीं है मैदान

वहीं सरकार खेल महाकुंभ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करती है ताकि बच्चे खेल के मैदान में अपना हुनर दिखा सकें लेकिन इस स्कूल में कक्षा तो छोड़िए प्रार्थना तक के लिए मैदान नहीं है. जी हां आपको बता दें इस स्कूल भवन का निर्माण 2008 में हुआ था. हमेशा से स्कूल की शुरुआत प्रार्थना से होती है लेकिन इस स्कूल में प्रार्थना करने के लिए मैदान तक भी नहीं बनाया गया है. आज दुनियाँ कहती है कि नया भारत में नई तकनीकी है लेकिन जब विद्यालय के भवन-आँगन ही नहीं तो बच्चे कहाँ अपना मनोरंजन करेंगे.

बच्चों ने खेल के मैदान में दिखाया हुनर और विदेशों में किया नाम रोशन 

उत्तराखंड के बच्चों ने खेल के मैदान में हुनर दिखाते हुए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नाम कमाया है और राज्य का नाम रोशन किया है…लेकिन इस स्कूल में न प्रार्थना के लिए मैदान है और न बच्चों के खेलने के लिए मैदान….ऐसे में सब पढ़े सब बढ़े और पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया जैसे स्लोगन खोखले होते दिखाई दे रहे हैं.

सीएम औऱ शिक्षा मंत्री से गुजारीश, ताकि बच्चों पर न हो सितम

सरकार से हमारी गुजारिश है कि जरुर इस खबर का संज्ञान लें…ताकि छोटे-छोटे बच्चों पर ऐसे सितम भविष्य में ना हो…औऱ सरकार का सब पढ़े-सब बढ़े का नारा साकार हो. मंत्री-विधायकों को सिर्फ शहर में रहकर ही जाम नहीं होना चाहिए बल्की गावों की हालत को भी देखना चाहिए ताकि पलायन रुके. हमारी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से गुजारिश है कि तुरंत स्कूल का संज्ञान लें.

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