उत्तराखंड के लवराज ने रचा इतिहास-छठी बार जीता एवरेस्ट

डेस्क -देहरादून के डोईवाला में तैनात बीएसएफ के सहायक कमांडेंट पद्मश्री लवराज सिंह धर्मशक्तू ने दुनिया की ऊंची चोटी एवरेस्ट को छठी बार जीत लिया है। बर्फीली चोटी एवरेस्ट पर छह बार तिरंगा फहराकर धर्मशक्तु ने इतिहास रच डाला है। उनकी पत्नी रीना कौशल की माने तो पद्मश्री धर्मशक्तु ऐसा कारनामा करने वाले देश के पहले शख्स बन गए है।

खबर के मुताबिक बीते बीते शुक्रवार को रात साढे दस बजे एवरेस्ट शिखर को फतह करने के लिए छठी बार निकले धर्मशक्तु ने शनिवार की सुबह छह बजकर 10 मिनट पर चोटी पर तिरंगा लहराया। पहली बार लवराज धर्मशक्तू 1998 में फस्र्ट इंडियन सिविलियन अभियान के तहत एवरेस्ट की सरजमी पर कदम रखा था।  इस बार लवराज ओएनजीसी के एवरेस्ट एक्सप्लोर अभियान के लीडर हैं।

बीते माह लवराज धर्मशक्तु की अगवाई में 13 अप्रैल को ओएनजीसी की टीम ने एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की थी। लवराज की अगुवाई में योगेंद्र गर्ब्याल, एन. जागोई और राहुल जरगल ने एवरेस्ट के लिए अंतिम चढ़ाई शुरू की। आठ घंटे की चढ़ाई के बाद शनिवार सुबह छह बजकर दस मिनट पर लवराज और योगेंद्र गर्ब्याल ने एक साथ एवरेस्ट पर कदम रखे। जबकि टीम के दूसरे साथी एन. जागोई और राहुल ने सात बजक 45 मिनट पर एवरेस्ट फतह किया।

एवरेस्ट फतह कर इतिहास रचने वाले लवराज धर्मशक्तू बीएसएफ में सहायक कमांडेंट हैं और इन दिनों देहरादून के डोईवाला में तैनात हैं। लवराज को साल 2003 में तेनजिंग नोर्गे नेशनल अवार्ड और साल 2014  में पद्मश्री से नवाजा गया है। वे मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले की मुनस्यारी तहसील के बोना गांव के रहने वाले हैं।

ओएनजीसी के एवरेस्ट एक्सप्लोर अभियान के दल के जिन चार सदस्यों को एवरेस्ट फतह करने में सफलता मिली, उनमें उत्तराखंड के धारचूला निवासी योगेंद्र गर्ब्याल ओएनजीसी में इंजीनियर हैं। जिन्होने एवरेस्ट पर जीत की सबसे पहली खबर अपनी मां दमयंती को फोन करके दी

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