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उत्तराखंड के दशरथ मांझी…जिसने बदला नदी का रुख, कई गांवों को बचाया बाढ़ के खतरे से

Breaking uttarakhand newsटनकपुर : आपने माउंटेन मैन का नाम तो सुना ही होगा…जिसे पूरा देश दशरथ मांझी के नाम से जानता है लेकिन चम्पावत जिले के बनबसा में भी एक शख्स ऐसा है जिसने अपने भागीरथी प्रयासों से एक मुहिम चलाकर कई गांवों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने का अकेले ही अलख जगाया है और पिछले आठ सालों से सुबह और शाम लगातार पांच से छः घंटों की कड़ी मेहनत कर हुड्डी नदी के रुख को ही बदलने का प्रयास कर कई गांवों को बाढ़ के खतरों से बचाने का काम किया है l इस शख्स को भी लोग उत्तराखंड के दशरथ मांझी के नाम से जानने लगे है, बनबसा के चन्दनी गाँव के इस शख्स का नाम है केशर सिंह करायत।

https://youtu.be/hQ7yDMYq62k

उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष बरसात के दौरान हुड्डी नदी के रौद्र रूप से कई गांवों में बाढ़ का पानी उपजाऊ जमीनों को काटकर गाँवो में घुसकर लोगो की फसलों को तबाह औऱ बर्बाद करता रहा था,उस पर सैनिक छावनी के पीछे का बूचड़ी नाला हुड्डी नदी के रुख को औऱ अधिक भयावह बना देता थाl आठ वर्ष पहले बनबसा के चन्दनी गाँव निवासी कृषक केशर सिंह करायत ने गाँवों को बचाने की मुहिम शुरू कीl उसने सुबह और शाम रोज नदी में जाकर पत्थरों को इकठ्ठा कर किनारो पर वायरक्रेट्स की तरह बंधा बांधकर सबसे पहले बूचड़ी नाले के रुख को बदलने का काम किया औऱ उसके बाद हुड्डी नदी के तटबंधों को एक एक पत्थर नदी से लाकर सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी, यह कार्य इस कर्मयोगी ने लगातार अकेले ही आठ सालों की कड़ी मेहनत से लगभग एक किलोमीटर के नदी के तटबंधों को बांधने का काम किया हैl परिणाम स्वरूप नाले औऱ नदी का रुख आखिरकार बदल ही गया जिसका नतीजा है कि वर्तमान में चन्दनी, आनंदपुर औऱ बमनपुरी गाँव बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित नजर आने लगे हैंl नाले और नदी के कटाव से अब कैंट एरिया भी सुरक्षित दिखाई दे रहा हैl

केशर सिंह करायत की गाँवों को बचाने की मुहिम अब रंग लाने लगी है, नदी के किनारे बसे तीनोंगांव अब बाढ़ से सुरक्षित नजर आने लगे हैंl वहीँ अब क्षेत्रीय लोग भी इस मुहिम से खुश होकर केशर सिंह को सरकार से सम्मान दिलाने की मांग करने लगें है,और इस कर्मयोध्दा को उत्तराखंड के दशरथ मांझी के नाम से पुकारने लगे हैl

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