उत्तराखंड : DM की पहल से महिलाओं को मिलेगा रोजगार, स्थानीय उत्पादों को पहचान

 

नैनीताल : ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने में स्वयं सहायता समूहों का विशेष योगदान है। DM सविन बंसल ने भी कुछ ऐसी ही योजना बनाई है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर खासा जोर दिया है। उत्तराखण्ड को प्राकृतिक खुबसूरती की नेमत मिली है। वहीँ, प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हस्तशिल्प, कुटीर उद्योगों के अलावा लजीज पहाडी व्यंजनों, हस्तकला, समृद्ध संस्कृति एवं परम्परागत पहनावा यहां के तीज त्यौहार भी पर्यटकों के बीच में काफी लोकप्रिय है। डीएम सविन बंसल ने एक नई पहल की है।

ग्रामीण महिलाओं में ख़ुशी

इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को बडे पैमाने पर आधुनिक लुक वाले वुडन आउटलेट उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इस प्रकार नैनीताल प्रदेश का पहला जिला होगा, जहां महिला स्वयं सहायता समूहों को जिला प्रशासन की और से हिलांस वुडन आउटलेट बनाकर दिये जा रहे हैं। जिनमें महिलायें अपने उत्पादों की ब्रिकी के साथ ही सैलानियों को लजीज व्यंजन भी परोसे जा सकेंगी। राज्य में पहली बार है कि इतने बडे पैमाने पर महिला स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने के लिए प्रशंसनीय कार्यवाही की जा रही हैै। जिलाधिकारी बंसल की इस सकारात्मक पहल से ग्रामीण महिलाओं में ख़ुशी है।

12 हिलांस वुडन आउटलेट बनकर तैयार

नैनीताल जिले में दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 12 पर्यटक स्थलों पर हिलांस वुडन आउटलैट तैयार कर लिये गये हैं। इन हिलांस वुडन आउटलेट को बनाने के लिए जिलाधिकारी द्वारा 35 लाख की धनराशि जिला योजना तथा अनटाइड फंड से उपलब्ध कराई गयी है। 12 हिलांस वुडन आउटलेट बनकर तैयार हो चुके हैं। जिलाधिकारी द्वारा चयनित स्थल सातताल, स्नोव्यू, मुक्तेश्वर,नौकुचियाताल, टी गार्डन श्यामखेत, सरस मार्केट हल्द्वानी, तहसील परिसर कालाढूगी, केव गार्डन, हनुमानगढी और सडिया ताल में यह हिलांस वुडन आउटलेट बनकर तैयार हो गये हैै। इन वुडन आउटलेट का निर्माण कुमाऊं मण्डल विकास निगम द्वारा किया गया है। प्रत्येक आउटलेट के निर्माण 3.46 लाख की धनराशि व्यय हुई है।

उत्पाद राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुचेंगे

इन हिलांस वुडन आउटलेट में स्वयं सहायता समूह की महिलायें अपने विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे अचार, मुरब्बा, दालें, मसाले, बडियां, हर्बल उत्पाद, रिंगाल/रामबांस से हस्त निर्मित टोकरियां एवं बैग, ऐपण व अन्य सामानों की ब्रिकी करेंगी। जिलाधिकारी की इस पहल से जहां महिलाओं को रोजगार मिलेगा। वही, जनपद के स्थानीय उत्पादों को पहचान और बाजार मिलेगा। पर्यटकों के जरिये जनपद के ग्रामीण उत्पाद राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुचेंगे।

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