उत्तराखंड: कौन है, जो नहीं चाहता प्राइवेट स्कूलों की लूट से मिले छुटकारा ?

देहरादून: उत्तराखंड सरकार को ढाई साल हो गए हैं। ढाई साल के कार्यकाल को लेकर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार की उपब्धियां गिनाईं। सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की महंगी फीस से राहत दिलाने के फीस एक्ट लाने का वायदा भी किया था। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कमीटी भी बनाई थी, लेकिन कौन है, जो फीस एक्ट के की राह में रोड़ा अटका रहा है।

एक्ट बनाने का निर्णय

एनसीइआरटी के लागू करने के साथ ही फीस एक्ट बनाने का निर्णय भी लिया गया था। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने तब हर हाल में फीस एक्ट को लागू करने के लिए कहा था। उन्होंने सभी जिलों में फीस एक्ट का प्रारूप तैयार करने के लिए जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में समिति बनाने के निर्देश दिए थे। शिक्षा सचिव और अन्य अधिकारियों को प्रारूप तैयार करने के लिए डेटलाइन भी दी थी, लेकिन फिर अचानक क्या हुआ कि फीस एक्ट की चर्चा होनी ही बंद हो गई।

जनता का समर्थन मिला

फीस एक्ट बनाने के निर्णय को लेकर जनता ने भी सरकार को पूरा समर्थन दिया था। इस फैसले को लेकर प्रदेशभर में अभिभावकों ने खुशी जाहिर की थी। प्रदेश में सरकार स्कूलों की हालत खस्ता है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में ही पढ़ाते हैं। 90 फीसद से अधिक बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। लोगों को उम्मीद थी कि उनको प्राइवेट स्कूलों की लूट से रावत मिलेगी। लेकिन, उनकी उम्मीदों को फिलहाल पंख नहीं लग पाए हैं।

ये है बड़ा सवाल

बड़ा सवाल ये है कि जब शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग पूरी तरह से फीस एक्ट के लिए तैयार है, तो फिर वो कौन है, जो नहीं चाहता कि फीस एक्ट नहीं बनना चाहिए। अरविंद पांडे हर बार यही कहते हैं कि चाहे कुछ भी हो, हर हाल में फीस एक्ट को लागूं करके रहेंगे, लेकिन फीस एक्ट लागूं नहीं हो पा रहा है। इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर किसी में इतनी ताकत है कि शिक्षा विभाग फीस एक्ट लागूं नहीं कर पा रहा है।

कौन रोड़े अटका रहा

अरविंद पांडे अच्छी तरह जानते हैं कि इस फैसले में कौन रोड़े अटका रहा है, लेकिन वो इस पर कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वो हर सवाल के जवाब में बस एक ही बात कहते हैं कि फीस एक्ट लागूं होगा। वहीं, दूसरी ओर सरकार के मुखिया कहते हैं कि फीस एक्ट लागूं करना आसान नहीं है। उसकी गंभीरता से समीक्षा करनी होगी।

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