उत्तराखंड : फिर चर्चा में आए पूर्व मुख्यमंत्री, ये है पूरा मामला

नैनीताल: पूर्व मुख्यमंत्रियों से करीब दो करोड़ 75 लाख सरकारी आवास का किराया और करीब 20 करोड़ सुविधाओं का बकाये का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकल आया है। हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार दर पर किराया वसूली का आदेश पारित किया था। इस मामले में रुलक संस्था से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा था, जिस पर संस्था की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है।

दरअसल, रुलक संस्था की ओर से जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पारित आदेश को सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों ने चुनौती दी थी। नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का मुख्यमंत्रियों का बकाया माफ करने का अधिनियम रद्द कर दिया था। कोर्ट के आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने तो बकाया जमा कर दिया जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी और राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।

उन्होंने इस आदेश को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध बताते हुए रद करने की प्रार्थना की है। पूर्व सीएम के अनुसार बाजार दर करते समय हाईकोर्ट द्वारा उनका पक्ष नहीं सुना गया है, अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रुलक की ओर से जवाब दाखिल किया गया है। जिसमें कहा है कि तीन साल तक चली हर सुनवाई में पूर्व सीएम के अधिवक्ता उपस्थित रहे।

संस्था का कहना है कि तब किसी ने आपत्ति नहीं उठाई, यदि यह आदेश लागू नहीं हुआ तो भविष्य में हर सरकारी आवास का कब्जेदार सरकारी दर पर किराया जमा कर आवास पर कब्ज़ा कर लेगा। रुलक के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की एडवांस लिस्ट में इस मामले को 25 फरवरी के लिए लिस्टेड किया गया है।

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