उत्तराखंड : दवा कारोबारियों की हड़ताल से बढ़ी लोगों की मुश्किलें, ये है मांगे

देहरादून : दवा की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट ने 28 सितंबर को बंद का आह्वान किया है। दवा व्यापारी लंबे समय से ऑनलाइन बिक्री का विरोध कर रहे हैं। उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ ने भी बंद की घोषणा की। केंद्र सरकार ड्रग पोर्टल नीति को बढ़ावा दे रही है। साथ ही ऑनलाइन दवा का काम करने वाली कंपनियों को लाइसेंस दिए जा रहे हैं।

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज कांडपाल ने बताया कि दवा की सभी दुकानें बंद रहेंगी। इस दौरान सभी दवा व्यवसायी महिला अस्पताल के सामने एकत्र होंगे और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम या सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपेंगे।

कुमाऊं में चार हजार से अधिक दवा की दुकानें हैं

उनका कहना है कि ड्रग पोर्टल नीति से दवा कारोबार पर असर पड़ेगा साथ ही ग्राहक से लेकर विक्रेता तक को नुकसान होगा। कुमाऊं में चार हजार से अधिक दवा की दुकानें हैं, जबकि हल्द्वानी में आठ सौ से अधिक दुकानें हैं।

 मांगें

ऑनलाइन पोर्टल बगैर किसी जवाबदारी के दवा के पर्चे की प्रामाणिकता को बिना चेक किए दवा दे रहे हैं।

एमटीपी किट, सिडनेफिल कोडीन जैसी दवाओं को पंजीकृत मेडिकल प्रेक्टिशनर के पर्चे के बगैर बेचा जा रहा है।

मनोचिकित्सक, त्वचा रोग विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञों के पर्चे पर लिखी जाने वाली दवाओं को गैर योग्यता प्राप्त डॉक्टर के पर्चे पर खरीदा जाता है।

दवाओं की बिक्री पुराने पर्चे या फिर बनावटी पर्चे पर की जाती है।

ऋषिकेश-हरिद्वार में दिखा बंद का असर

एफडीआई और ई कॉमर्स के विरोध में भारत बंद का ऋषिकेश क्षेत्र में पूरा असर देखा जा रहा है। डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के आह्वान पर इस बंद को सभी व्यापारी संस्थाओं ने अपना समर्थन दिया है। अन्य दिनों यहां का बाजार सुबह 9 बजे खुल जाता था, लेकिन यहां के सभी मुख्य बाजारों में दुकानों के शटर नहीं खुले हैं। केमिस्ट एसोसिएशन ने बंद को अपना समर्थन दिया है। वहीं हरिद्वार में भी इसका असर देखने को मिला. चंद्राचार्य चौक, पुराना रानीपुर मोड़ आदि जगहों पर मेडिकल स्टोर्स बंद हैं। इससे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।

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