गांव के छोरे ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन, विधायक ने दी बधाई-नगद पुरुस्कार

रुड़की : अगर कभी न हार मानने का जुनून हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है उत्तराखंड के छोटे से गाँव में रहने वाले 16 साल के उमंग ने…जिसने दिल में कुछ कर दिखाने का जज्बा लिए दिन और रात मेहनत की और मंजिल की ओर बढ़ा। बता दें कि उमंग ने देशभर से आय “खेलो इंडिया खेलो,यूथ गेम्स में प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही सिल्वर और गोल्ड मैडल भी जीता है। उमंग की इस जीत पर गाँव में ख़ुशी की लहर है, और उमंग के बधाई देने वालो का सिलसिला नही थम रहा है।

गोल्ड मैड़ल और नैशनल में सिल्वर मेडल भी जीते

उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव हरजोली जट के 16 वर्षीय उमंग ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। उमंग ने प्रदेशस्तरीय कुश्ती में गोल्ड मैड़ल और नेशनल में सिल्वर मेडल भी जीते हैं। उमंग की इस कामयाबी पर पूरे गाँव में खुशी का माहौल है। उमंग के आवास पर बधाई देने वालो का तांता लगा हुआ है। क्षेत्रीय विधायक काज़ी निजामुद्दीन भी उमंग की इस कामयाबी पर उन्हें बधाई देने गांव पहुँचे और नकद पुरुस्कार देकर सम्मानित किया। विधायक काज़ी निजामुद्दीन ने बताया कि स्पोर्ट्स में उनकी बेहद रुचि है, इस भागदौड़ भरी जिंदगी में खेल बहुत जरूरी है, उन्होंने बताया उनके बेटे और बेटी ने भी स्पोर्ट्स की दुनिया में कई नैशनल मैडल जीते हैं।

गांव के लड़के ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में कांस्य पदक जीता

आपको बता दें कि उत्तराखंड के मंगलौंर कस्बे का गांव हरजोली जट निवासी 16 वर्षीय उमंग पुत्र जोगेंद्र सिंह ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में कांस्य पदक जीतकर पूरे उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। इससे पूर्व उमंग ने प्रदेशस्तरीय कुश्ती चैंपियन शिप में गोल्ड मैड़ल और नैशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर अपने नाम किया था। उमंग की इस जीत पर पूरे गाँव मे खुशी का माहौल बना हुआ है। उमंग ने बताया कि गुवाहाटी आसाम में होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स में उसने कांस्य पदक जीता है, जिसका श्रेय वह अपने पिता, भाई और ट्रेनर को दिया।

घर के काम के साथ करते थे प्रैक्टिस

उमंग ने बताया उनकी जीत पर गाँव में जश्न जैसा माहौल है। लोग उन्हें बधाई देने आ रहे हैं। उन्होंने बताया वह घर के कामकाज के साथ-साथ कुश्ती की प्रैक्टिस करते थे और बस एक ही धुन सवार रहती थी कि अपने देश का नाम रोशन करना है। उन्होंने ये भी बताया है कि अभी ये कामयाबी उनकी पहली सीढ़ी है अभी देश के लिए गोल्ड मैडल उन्हें जीतना है।

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