उत्तराखंड : छात्रों ने मास्टरनी पर लगाया बेरहमी से पिटाई करने का आरोप, पहुंची पुलिस

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने अपनी शिक्षकी पर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया औऱ हंगामा किया. सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को समझाने की कोशिश की लेकिन छात्र शिक्षिका पर लगातार आरोप लगा रहे हैं और इंसाफ की मांग कर रहे हैं. बच्चों का कहना है कि कोई पढ़ाई की गलती पर नही बल्कि पिटाई इसलिए हुई क्यों कि मास्टरनी फोन पर बात कर रहीं थीं और कक्षा में शोर हो रहा था। वहीं सूचना पर खण्ड शिक्षा अधिकारी ने पहुंच कर घटना का जायजा लिया और कार्रवाही का आश्वासन दिया।

छात्रों ने केमिस्ट्री की टीचर पर लगाया पिटाई करने का आरोप

काशीपुर महुआ खेड़ा गंज के राजकीय स्कूल के छात्रों ने केमिस्ट्री के अध्यापक स्वाति पांडे पर छड़ी से पिटाई करने का आरोप लगाया औऱ अपने घाव भी दिखाए. बच्चों का कहना है कि शिक्षिका अपने फोन में व्यस्त थीं और कक्षा में शोर होने के कारण टीचर ने उन्हें बेरहमी से पीटकर चोटिल कर दिया. जिसके बाद बच्चों ने अध्यापक के खिलाफ प्रदर्शन किया और स्कूल प्रशासन हाय हाय के बैनर लगाकर नारेबाजी की.

बच्चों को न दी जाती सही शिक्षा और ना ही समय रहते सब्जेक्ट पढ़ाए जाते हैं- अभिभावक

बच्चों की पिटाई के बाद सूचना मिलने पर अध्यापक की शिकायत करने अभिभावक भी स्कूल पहुंच गए. खंड शिक्षा अधिकारी को बुलाकर स्कूल के अध्यापक के खिलाफ शिकायत की और अभिभावकों ने बताया कि ना तो स्कूल में बच्चों को सही शिक्षा दी जाती है और ना ही समय रहते उनके सब्जेक्ट की पुस्तकों को पूर्ण रूप से नहीं पढ़ाया जाता है. पिछले साल भी केमिस्ट्री की किताब के मात्र दो ही पाठ पढ़ाए गए थे जिसके चलते कुछ नौनिहाल भी फेल हुए थे और इस साल भी दो ही पाठ पढ़ाए गए हैं. वहीं अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के साथ मारपीट ना की जाए और समय रहते उनको अच्छी शिक्षा दी जाए.

खंड शिक्षा अधिकारी का बयान, इस कारण आया शिक्षिका को गुस्सा

जब बात खंड शिक्षा अधिकारी से की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि स्कूल में पढ़ रहे बच्चों अनुशासनहीनता कर रहे थे जिसके चलते अध्यापक को गुस्सा आ गया। उन्होंने बच्चों को मारा लेकिन अध्यापक को इस तरीके का दंड देने का कोई अधिकार नहीं

मैडम को स्कूल में पढ़ाते -ढ़ाते 3 साल हो गए-अधिकारी

वहीं खंड शिक्षा अधिकारी का यह भी कहना है कि मैडम को स्कूल में पढ़ाते -ढ़ाते 3 साल हो गए किसी में आज तक उनकी कोई भी शिकायत नहीं आई, इसलिए उन्हें इस बार चेतावनी दी जाएगी, वहीं बात जब बच्चों को पढ़ाने की की गई तो खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अगर ऐसा था तो प्रिंसिपल या हमारे पास बच्चों को शिकायत करनी थी लेकिन उनके द्वारा कोई भी शिकायत हमें प्राप्त नहीं हुई फिर भी उनके हमारे द्वारा इस पर जांच की जाएगी.

बच्चों के आरोपों की जानी चाहिए की चाहिए

बच्चों के आरोपों की जांच की जानी चाहिए और अगर ये आरोप सहीं है तो जरुर शिक्षिका पर कार्रवाही होनी चाहिए. क्योंकि इस तरह से बच्चों का मानसिक उत्पीड़न होता है. अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक ही जब अनुशासनहीनता करेंगे तो उनसे शिक्षा लेने वाले बच्चे उनसे किस तरीके की शिक्षा लेंगे. यह खुद आप अनुमान लगा लीजिए और ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती क्यों उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है.

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