उत्तराखंड: श्रमदान और आपसी सहयोग की ऐसी मिसाल, जिसे पीढ़ियां रखेंगी याद

टिहरी: लाॅकडाउन में उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों से कई अच्छी खबरें आई। ऐसी ही एक अच्छी खबर जौनपुर ब्लाॅक के अग्यारना गांव से भी आई है। लॉकडाउन के दौरान गांव पहुंचे जौनपुर ब्लॉक के अग्यारना गांव के नौजवानों ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख और निदेशक सहकारी संघ उत्तराखंड गीता रावत की प्रेरणा और सहयोग से गांव के लिए 500 मीटर रोड़ खुदवाकर लोगों की राह आसान बना दी। अब लोगों को मुख्य सड़क से 500 मीटर चढ़ाई से निजात मिल सकेगी। गांव में गाड़ी पहुंचते ही लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सरकारी सिस्टम पर निर्भर रहने की बजाए अग्यारना गांव के लोगों ने श्रमदान की भी मिशाल पेश की है।

जौनपुर ब्लॉक के छैजुला पट्टी का अग्यारना गांव थत्यूड़-कैपटी मोटर मार्ग पर स्थित है। लेकिन करीब 30 परिवार वाले इस गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को 500 मीटर की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कतें बीमारों को अस्पताल भेजने, बच्चों को स्कूल जाने और बुजुर्गों को बाजार तक जाने के लिए उठानी पड़ती थी। नकदी फसल, सब्जी, फल आदि भी बाजार तक ले जाने में समस्या होती थी। ऐसे में पूर्व प्रमुख और अग्यारना गांव निवासी गीता रावत ने लॉकडाउन के दौरान नई मुहिम शुरू की।

खास बात यह रही कि युवाओं ने स्वयं जिम्मेदारी लेते हुए इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया। ग्राम प्रधान पिंकी असवाल, पूर्व प्रधान श्याम सिंह असवाल ने कहा कि यदि मन में कुछ ठान लिया जाए तो लक्ष्य पूरा करने की प्रेरणा मिलती है। इस कार्य में प्रवीन असवाल, चैन सिंह रावत, सजयं रावत, कुलवीर असवाल, गंभीर सिंह रावत आदि ने सहयोग दिया है। उन्होंने लॉकडाउन के चलते विभिन्न क्षेत्रों से गांव पहुंचे युवाओं से अपील की कि क्यों न इस समय का सदुपयोग कर गांव तक श्रमदान तक रोड़ पहुंचाई जाए।

उनकी प्रेरणा से युवाओं ने प्रत्येक परिवार से एक-एक हजार रूपए एकत्रित किए। जबकि पूर्व प्रमुख गीता रावत ने जेसीबी के लिए 10 घंटे की खुदाई का पैसा दिया। करीब चार दिन में सोमवार को जेसीबी ने खुदाई कर गांव तक सड़क पहुंचा दी। गांव में जेसीबी पहुंचते ही लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। पूर्व प्रमुख रावत ने सड़क का शुभारंभ करते हुए बताया कि इस कार्य पर करीब एक लाख रूपए खर्च हुए। जिसे सभी के सहयोग से पूरा किया गया।

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