वाह रे, उत्तराखंड पुलिस, मुख्यमंत्री के दावों पर उठा दिया सवाल?, अधिकारियों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया!

 

उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार में कुंभ को कोरोना के सुपर स्प्रेडर के तौर पर लगे आरोपों के बचाव के चक्कर में सेल्फ गोल कर लिया है। सोशल मीडिया पर उत्तराखंड पुलिस ने अपनी ही बात को खुद ही झूठा बताने वाली खबर को शेयर किया है। न सिर्फ अपनी बल्कि पीठ थपथपाने के चक्कर में उत्तराखंड पुलिस ने सूबे के मुख्यमंत्री को भी झूठा साबित कर दिया है।

दरअसल उत्तराखंड पुलिस ने अपनी आधिकारिक फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट शेयर की। इस पोस्ट में एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर की कटिंग को शेयर किया गया है। इस खबर की हेडिंग है –  ‘कुंभ को बेवजह किया गया बदनाम’। इस खबर का लबोलुआब ये है कि कुंभ को कोरोना का सुपर स्प्रेडर मानना गलत है। चार कॉलम की इस खबर में अखबार ने अपनी पड़ताल के हवाले से बताया है कि हरिद्वार में महाशिवरात्रि पर 35 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान का मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का दावा गलत है। यही नहीं अखबार ने लिखा है कि, ‘सरकार का दावा है कि महाशिवरात्रि और तीनों शाही स्नान के दिन ही लगभग 65-70 लाख भक्त डुबकी लगाकर गए। नतीजतन कुंभ को कोरोना स्प्रेडर के रूप में प्रचारित करने वालों को सब कुछ थाली में सजा सजाया मिल गया।’

अब इसी खबर में अखबार आगे लिखता है, ‘पड़ताल की तो जो आंकड़े सामने आए हैं वो दावे के आंकड़ों से काफी नीचे हैं।’ अखबार आगे की लाइनों में अपनी पड़ताल के आधार पर लिखता है कि कुल 11 लाख लोग ही गंगा स्नान के लिए पहुंचे।

अब उत्तराखंड पुलिस के इस फेसबुक पोस्ट के माएने क्या निकाले जाएं? अखबार की ये खबर सीधे सीधे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के दावों का माखौल उड़ाती है। मुख्यमंत्री बार बार ये दावा करते रहें हैं कि कुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। खुद पुलिस के अधिकारी कुंभ मेले में गंगा स्नान करने वाले की संख्या 40 लाख के आसपास बताते रहें हैं। लेकिन अखबार में छपी ये खबर मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों के दावों को गलत साबित कर रही है। लेकिन बावजूद इसके ये खबर खुद पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से शेयर की जा रही है।

उत्तराखंड पुलिस की फेसबुक वॉल का स्क्रीनशॉट

हालांकि दिलचस्प ये भी है कि इस पोस्ट में नीचे आम लोगों के कमेंट्स पुलिस को कठघरे में खड़ा कर रहें हैं।

रश्मि सती नाम की एक यूजर लिखती हैं –

मेरे ख्याल से पुलिस खुद में एक व्यवस्था है ,पुलिस के द्वारा सरकार की हिमायत करना या किसी एक धर्म विशेष की हिमायत करना गलत है ।अगर ऐसा है तो पिछले साल हम लोगों ने जमात समाज को भी बहुत निशाने पर लिया था तब क्यों सफाई नहीं दी आपने। कुंभ में साधुओं के एकाएक मरने और उनके द्वारा खुद ही कुंभ को स्थगित करने से पता चलता है की स्थिति कितनी खराब हो गयी थी ।

नीतेश एस वोहरा नाम के यूजर लिखते हैं –

Uttarakhand Police  ने अपनी ड्यूटी अच्छे से निभाई। लेकिन कोविड एक दिन में नहीं फैल जाता। अप्रैल में कराये गये कुंभ का असर अब पिछले कुछ दिनों से दिख रहा है । कुंभ में स्नान करने लाखों की संख्या में देश भर से लोग आते गए और वापस जाकर अपने अपने राज्यों में कोविड स्प्रैडर का काम किया।

आशीष चौहान लिखते हैं –

पुलिस का काम सरकार का प्रोपेगंडा आगे बढ़ाना नहीं है, और मीडिया का हाल तो आपको पता ही है इसलिए पुलिस को सरकार का एजेंट न बनते हुए निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए! और इन मुद्दों को साइंटिफिक स्टडी हेतु छोड़ देना चाहिए।

अखिलेश डिमरी नाम के यूजर लिखते हैं –

सही बात, उत्तराखंड पुलिस का धन्यवाद कि उन्होंने अखवार में छपे इस आर्टिकल को अपना आधिकारिक बयान माना है, अब मेरा तो मत है कि कुम्भ सालों साल चलना चाहिए था।

अब WHO के खिलाफ केस दर्ज किया जाए उन्होंने भी भारत में कुंभ आयोजन, चुनाव रैलियों व कोरोना के सम्बंधो को लेकर टिप्पणी की थी ।

पीएम ने की थी कुंभ खत्म करने की अपील

उत्तराखंड पुलिस इस पोस्ट को शेयर कर दोतरफा फंस गई है। एक तरफ तो वो कुंभ में कम श्रद्धालुओं के पहुंचने की खबर को अपनी तरफ से सबको सुना रही है तो वहीं राज्य के मुख्यमंत्री और अपने ही विभाग के अधिकारियों के पूर्व के दावों को गलत ठहरा रही है। दो कदम आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड पुलिस ने पीएम नरेंद्र मोदी की अपील को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। आपको याद दिला दें कि दूसरे शाही स्नान के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 17 अप्रैल को आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी को फोन कर कुंभ के बचे हुए शाही स्नानों को प्रतीकात्मक रखने की अपील की थी। पीएम ने बाकायदा इसकी जानकारी ट्वीट कर दी भी। पीएम की अपील का असर हुआ और बचे हुए शाही स्नान से पहले ही कई अखाड़ों ने कुंभ समाप्ति की घोषणा कर दी। अब सवाल ये कि अगर अखबार की खबर को सही माना जाए तो भीड़ कम थी तो ऐसे में पीएम की अपील की जरूरत क्यों पड़ी?

चली गई थी त्रिवेंद्र की कुर्सी

कुंभ को लेकर एक और एंगल भी है इस स्टोरी में। दरअसल कुंभ में कोरोना फैलने की आशंका पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी थी। इसीलिए वो बार बार कुंभ को सीमित रखने का बयान देते रहे। हालांकि त्रिवेंद्र सिंह रावत को कुंभ को भव्य बनाने की कोशिश न करने का खामियाजा अपनी कुर्सी देकर चुकाना पड़ा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि कुंभ को सीमित रखने के त्रिवेंद्र के फैसले से नाराज कई धर्मगुरुओं ने केंद्र से इसकी शिकायत की और बाद में केंद्र और बीजेपी ने त्रिवेंद्र को हटा कर तीरथ को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री पद संभालने के अगले ही दिन तीरथ सिंह रावत हरिद्वार पहुंचे और उन्होंने ऐलान किया कि कुंभ भव्य और दिव्य होगा। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई रोकटोक नहीं है।

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