

चंपावत: कोरोना काल में लाग इलाज के दर-दर भटक रहे हैं। कोरोना संकट के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बुखार की दवा के लिए भी कई किलोमीटर चलकर बाजार पहुंचना पड़ रहा है। जबकि उनके क्षेत्र में पहले से आयुर्वेदिक अस्पताल है, लेकिन उसमें पिछले एक साल से डाॅक्टर ही नहीं है।
पाटी विकास खंड के आयुर्वेदिक अस्पताल चैड़ाकोट में एक साल से डाक्टर की तैनाती न होने से ताला लटका हुआ है। क्षेत्र की लगभग चार हजार की आबादी को प्राथमिक उपचार के लिए जिला मुख्यालय या फिर लोहाघाट आना पड़ा रहा है। कोरोना काल में लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ गई है। ग्राम प्रधान आशा मौनी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर चैड़ाकोट अस्पताल में जल्द से जल्द डॉक्टर की नियुक्ति करने की मांग की है।
उनका कहना है कि एक साल से आयुर्वेदिक अस्पताल मे डॉक्टर न होने से ताला लटका हुआ है। इस अस्पताल पर चैड़ाकोट के अलावा थुवामौनी, मौनकांडा, डसियाचामी, सिमली, डुंगरासों आदि गांवों की चार हजार से अधिक की आबादी निर्भर है। लेकिन अस्पताल बंद होने से सर्दी, जुकाम होने पर भी लोगों को 30 से 45 किमी दूर चम्पावत, लोहाघाट या फिर खेतीखान के अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। इससे लोगों के समय और धन की बर्बादी हो रही है। उन्होंने बताया कि कोरोना के इस समय में अस्पताल बंद होना लोगों को काफी अखर रहा है।