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उत्तराखंड : मेडिकल काॅलेजों में बॉन्ड सिस्टम खत्म होने से कर्जदार बने मेडिकल स्टूडेंट्स

हल्द्वानी : राज्य में दो मेडिकल काॅलेजों में पिछले साल बाॅन्ड सिस्टम को समाप्त कर दिया गया था। बाॅन्ड सिस्टम समाप्त होने से इन काॅलेजों में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे मेडिकल स्टूडेंट के लिए पढ़ाई जारी रख पाना मुश्किल हो रहा है। सरकार मेडिकल काॅलेजों में स्टूडेंट्स को प्रत्येक साल 4 लाख से ज्यादा फीस भरनी पड़ रही है। पिछले एक साल से स्टूडेंट बाॅन्ड सिस्टम को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन, सरकार उनकी मांगों को मानना तो दूर, उनकी बात सुनने को भी तैयार नहीं है।

almoda medical collage

मेडिकल स्टूडेंट की मानें तो प्रत्येक साल उनके लिए 4 लाख रुपये भर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि अच्छी तैयारी करने के बाद हाई रैंक हासिल करते हैं और फिर सरकारी काॅलेजों में एडमिशन लेते हैं, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं है। महंगी फीस देने के लिए कई स्टूडेंट्स ने कर्ज लिया है। उनका कहना है कि लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं है।

यहां देखें –Fee-detail-MBBS-30July2020

हरिद्वार जिले के पूरनपुर गांव के दिहाड़ी मजदूर के बेटे अजय दुबे ने दून मेडिकल काॅलेज में 70 हजार उधार लेकर एडमिशन लिया था। परिवार खुश था कि उनको बेटा डाॅक्टर बन जाएगा। सरकार की सब्सिडी वाली व्यवस्था से भी खुश थे, लेकिन अचानक फीस चार लाख होने से अब उसके सामने फीस जमा करने का संकट खड़ा हो गया है।

यहां देखें – Annual Fee order 2020

बॉन्ड सुविधा समाप्त होने के बाद राज्य के मेडिकल काॅलोज देश में सबसे महंगी मेडिकल पढ़ाई कराने वाले काॅलेज बन गए हैं। देश में नामी मेडिकल काॅलेज बाबा साहेब अंबेडकर मेडिकल कॉलेज (दिल्ली), गाओ मेडिकल कॉलेज और अंडमान निकोबार मेडिकल कॉलेज जैसे देश में सरकारी मेडिकल कॉलेज प्रति वर्ष करीब एक लाख रुपये फीस लेते हैं। हिमाचल भी हमारे राज्य से आधी से भी कम फीस लेता है। छात्रों को आरोप है कि अगर इसी तरह चलता रहा, तो कई स्टूडेंट्स को मेडिकल की पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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