उत्तराखंड: करना पड़ सकता है सबसे बड़े संकट का सामना, गुल हो जाएगी बत्ती

 

देहरादून: राज्य में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण शहर से गांव तक पावर कट किया जा रहा है। स्थिति यह है कि औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगपति इंडस्ट्री नहीं चलने से गुस्से में हैं। इधर, आज भले ही सीएम धामी ने ऊर्जा निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई हो। लेकिन, फिलहाल समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

अब राज्य सरकार के पास केंद्र सरकार की शरण में जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है, फिलहाल जो एकमात्र विकल्प है। वह बिजली कटौती का है। शनिवार यानी आज सीजन के सबसे बड़े बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है। राज्य में बिजली डिमांड 45.5 मिलियन यूनिट के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है। जबकि, उपलब्धता सिर्फ 38.5 मिलियन यूनिट ही है।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार इस कारण कल शनिवार को औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा, छोटे बड़े सभी नगरों में कटौती करने की तैयारी है। आज राज्य में उद्योगों में छह घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में चार से पांच घंटे और ज्वालापुर, हल्द्वानी, रुड़की, काशीपुर, जसपुर, बाजपुर, कालाढूंगी, डोईवाला समेत नगरों में दो घंटे तक की कटौती

बड़े शहरों में एक घंटे तक की कटौती रही। देहरादून के कुछ हिस्सों में भी कटौती करनी पड़ी। शनिवार के लिए राज्य की डिमांड 45.5 एमयू की डिमांड के मुकाबले सात मिलियन यूनिट बिजली कम है।

इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पांच से छह घंटे, छोटे नगरों में दो से तीन घंटे और बड़े शहरों में एक घंटे से अधिक की कटौती हो सकती है। जबकि फर्नेश उद्योगों में आठ से दस घंटे और अन्य उद्योगों में छह से आठ घंटे तक की बिजली कटौती हो सकती है। राज्य को पहले 7.5 एमयू बिजली गैस प्लांट से मिलती थी। जो पूरी तरह बंद हैं।

इस बार गर्मी बढ़ने से पांच एमयू की डिमांड समय से पहले ही बढ़ गई है। इस तरह राज्य पर 12.5 एमयू का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। जहां पहले यूपीसीएल को बाजार से सिर्फ तीन चार एमयू ही बिजली लेनी पड़ती थी। इस बार 15 एमयू तक बिजली लेनी पड़ रही है।

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