उत्तराखंड : 1871 में हुआ था शुरू, 149 साल में पहली बार नहीं होगा ये मेला

 

 

पिथौरागढ़ : कोरोना के कारण कई परंपराएं नहीं निभाई जा सकीं। कई मेले और आयोजन ऐस थे, सालों से आयोजित होते रहे। लेकिन, कोरोना के कारण वो मेले नहीं हो पाए। ऐसा ही एक मेला पिथौरागढ़ के जौलजीबी का मेला है, जो पिछले कई सालों से होता आ रहा है, लेकिन इस बार मेला आयोजित नहीं होगा।

149 साल पुराना ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेला नहीं होगा। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों की बैठक में कोरोना के कारण मेले का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया है। धारचूला एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला ने जौलजीबी पंचायत घर में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। सरपंच तारा चंद, टीका प्रसाद और बसंती देवी सहित अन्य लोगों ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार जौलजीबी मेले का आयोजन नहीं करना चाहिए।

14 नवंबर को मेले की शुरूआत के दिन गाइडलाइन का पालन करते हुए कलश यात्रा और कुछ कार्यक्रमों का आयोजन करने का सुझाव दिया। एसडीएम ने बताया कि कोरोना के कारण इस बार मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसका आयोजन 1871 में राजा पुष्कर पाल ने शुरू कराया था।

महाकाली और गोरी नदी के संगम पर 1871 में अस्कोट के तत्कालीन राजा पुष्कर पाल ने ज्वालेश्वर मंदिर स्थापित किया था। इसी साल मेले की शुरुआत हुई थी। 1962 से पहले इस मेले में बड़ी संख्या में तिब्बती व्यापारी भी आते थे लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद यहां तिब्बती व्यापारियों ने आना बंद कर दिया। मेले में स्थानीय व्यापारी तिब्बत से सामान लेकर इसकी बिक्री करते हैं।

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