उत्तराखंड: राजनीति के हर दांव में माहिर थीं इंदिरा हृदयेश, ऐसे ही नहीं चढ़ीं सफलता की सीढ़ियां

देहरादून: नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस की वरिष्‍ठ नेता इंदिरा हृदयेश का रविवार को निधन हो गया. वह उत्तराखंड सदन नई दिल्ली में ठहरी हुईं थीं. बीते रोज प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के साथ बैठक में शिरकत की थी, जिसके बाद उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह भी उत्तराखंड सदन में मौजूद थे, उन्‍होंने कहा कि उत्तराखंड और कांग्रेस को गहरा आघात पहुंचा है.

इंदिरा हृदयेश का राजनीतिक जीवन

1974-1980 उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं (पहला कार्यकाल), 1986-1992 उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं (दूसरा कार्यकाल), 1992-1998 फिर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं (तीसरा कार्यकाल), 1998-2000 लगातार चैथी बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं (चैथा कार्यकाल)।

2000-2002 सदस्य अंतरिम उत्तराखंड विधानसभा नेता विपक्ष, उत्तराखंड विधानसभा। 2002-2007 उत्तराखंड विधानसभा के लिए चुनी गईं (पहला कार्यकाल) सरकार में लोक निर्माण, संसदीय मामलों की कैबिनेट मंत्री, राज्य संपत्ति, सूचना, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भी संभाले।

2012-2017 उत्तराखंड विधानसभा के लिए निर्वाचित (दूसरा कार्यकाल) कैबिनेट मंत्री वित्त, वाणिज्यिक कर, टिकट और पंजीकरण, मनोरंजन कर, संसदीय कार्य, विधायी कार्य, चुनाव, जनगणना, भाषा, प्रोटोकॉल जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली। 2017-2021 उत्तराखंड विधान सभा के लिए निर्वाचित (तीसरा कार्यकाल) वर्तमान में वे नेता प्रतिपक्ष थीं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों के लिए दिल्ली में बैठकें आयोजित की जा रही थी। उनमें शामिल होने दिल्ली गई हुई थी।

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