उत्तराखंड: ऐसे कैसे हारेगा कोरोना, WhatsApp से भेज दिया कंटेनमेंट जोन का आदेश!

चम्पावत: कोरोना काल में कंटेनमेंट जोन का मतलब संबंधित ऐरिया को पूरी तरह सील करना होता है। लेकिन, यह व्यवस्था फेल नजर आ रही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण रोकने को लेकर सरकार और प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कंटेनमेंट जोन निर्धारण के लिए बेरिकेडिंग तो दूर, गांव के रास्तों पर रस्सी तक नहीं लगाई गई है। गाइडलाइन के उल्लंघन की कई शिकायतें सामने आ रही हैं।

मामले सौराई गांव का है। गांव के पूर्व प्रधान दान सिंह बोहरा ने बताया कि, तीन दिन पहले उनके गांव को कंटेनमेंट जोन घोषित करने का आदेश प्रशासन ने WhatsApp से भेज दिया। सड़क से दस किमी दूर इस गांव में अब तक कोई सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा है। पेड़ गिर जाने से गांव का रास्ता भी बंद है। जिससे घोड़ों से राशन की आपूर्ति भी नहीं हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चंपावत के एसडीएम टीएस मर्तोलिया ने बताया कि, कंटेनमेंट जोन निर्धारण के लिए टीम सौराई गांव भेजी गई थी। गांवों में कई रास्ते होने के कारण बैरिकेडिंग मुमकिन नहीं है। जोन में रहने वाले लोगों की मॉनिटरिंग की जा रही है।

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