उत्तराखंड : खास है गरुड़ टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट, CM तीरथ सिंह रावत ने किया शुभारंभ

ऋषिकेश : मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ’गरूड़ टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस स्वास्थ्य सेवा से राज्य के दूर-दराज के ग्रामीणों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए सरकार ने विभिन्न तैयारियों के साथ-साथ ब्लाॅक स्तर पर कोविड कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। एम्स पहुंचे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यूथ ऑफ मेडिकोज संगठन द्वारा संचालित गरूड़ टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट का बटन दबाकर विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड संक्रमितों की संख्या बढ़ गई है। इस लिहाज से यह प्रोजेेक्ट कोविड संक्रमितों को चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने में विशेष लाभकारी साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के संक्रमण को कम करने और समय पर उपचार के लिए उत्तराखंड में अन्य राज्यों की तुलना में डेढ़ गुना अधिक टेस्टिंग की जा रही है। कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना है। उन्होंने एम्स में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा सुविधाओं की प्रशंसा की व बताया कि उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हिमाचल के लोग भी एम्स ऋषिकेश से स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कान्त ने मुख्यमंत्री को एम्स में कोविड केयर मैनेजमेंट और मरीजों को दिए जा रहे उपचार संबंधी जानकारी दी। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रोफेसर रवि कान्त ने कोविड केयर मैनेजमेंट के लिए संस्थान में एक 40 हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कोविड आईसीयू के 250 बेड हैैं। इनकी संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधनों के अलावा पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्टाफ की आवश्यकता है।

इससे पूर्व ’गरूड़ टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट’ के प्रबंधक और यूथ मेडिकोज संगठन के संस्थापक डाॅ. विनोद कुमार जी ने मुख्यमंत्री को गरूड़ प्रोजेक्ट के बारे मे विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रशिक्षण के बाद मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ राज्य की प्रत्येक तहसील तक कोविड केयर प्रोवाइडर उपलब्ध कराएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए राज्य के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के लगभग 1600 आवेदन आए थे, जिनमें से लगभग 800 लोगों का चयन किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, दिनेश, ऋषिकेश मेयर अनिता ममगाईं, कुसुम कंडवाल, डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता जी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. बीके बस्तिया जी, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डाॅ. मीनाक्षी धर जी, डा. नवनीत मैगन जी, ट्राॅमा सर्जन डा. मधुर उनियाल जी संस्थान के प्रोेजेक्ट के राज्य समन्वयक डा. राहुल आदि मौजूद थे।

क्या है गरूड़ टेलीमेडिसिन प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट का संचालन यूथ ऑफ मेडिकोज संगठन से जुड़े चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे उत्तराखंड में लोगों को कोविड उपचार में काफी मदद मिलेगी। प्रोजेक्ट से जुड़े युवा डाॅक्टरों की टीम तहसील और ब्लाॅक स्तर पर निःशुल्क टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध कराएगी। जल्द ही इसके लिए टोल फ्री नंबर जारी होने के बाद राज्य के पहाड़ी इलाकों के रोगी भी घर बैठे इस टेलीमेडिसिन सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यूथ ऑफ मेडिकोज के संस्थापक और इस प्रोजेक्ट के प्रबंधक डाॅ. विनोद कुमार ने बताया कि फोन करने वाले मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी समस्या की स्थिति के अनुसार इस सुविधा द्वारा वरिष्ठ चिकित्सकों के परामर्श पर फोन करने वाले मरीज को उपचार दिया जाएगा और कोविड संक्रमित सामान्य लक्षण वाले रोगियों को अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं होगी। इस प्रोजेक्ट में आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है।

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