उत्तराखंड में बेरोजगारी की मार, नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरफ्तार, आरोपी विज्ञान से परास्नातक

देहरादून : उत्तराखंड में युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं और बेरोजागारी के कारण आए दिन बेरोजगार युवक-युवती ठगी का शिकार हो रहे हैं तो वहीं कुछ पढ़े लिखे लोगों को नौकरी न मिलने के कारण वो गलत रास्ते को चुन रहे हैं। जी हां साइबर क्राइम सेल की टीम ने ऐसे ही नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले ऊखीमठ और ऋषिकेश निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो की अच्छी पढ़ाई कर चुके हैं। दोनों आरोपियों पर लोगों से लाखों रुपये ठगने और वन विभाग के फर्जी दस्तावेज और अधिकारी बनने का आरोप है। साथ ही दोनों आरोपी अबतक 27 लोगों को वन विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा दे चुके हैं।

विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी

मिली जानकारी के अनुसार साइबर क्राइम पुलिस को जानकारी मिली कि आम जनता को नौकरी दिलाने का लालच देकर ठगी की जा रही है। जिसकी जांच करने पर पता चला कि कई आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तराखण्ड वन विभाग में नियुक्ति दिलाने का लालच देकर कई बेरोजगारों से ठगी कर रहे हैं,, जिस पर उत्तराखण्ड वन विभाग ने 6 फरवरी को थाना साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन में तहरीर दी। अज्ञातों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदम दर्ज किया गाय़.

खुद को बताते थे वन विभाग में अधिकारी

आरोपियो की धड़पकड़ के लिए ये जांच निरीक्षक पंकज पोखरियाल को सौंपी गई। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया गया। तो टीम को जानकारी मिली कि कुछ लोग राज्य के बेरोजगार युवक युवतियों को वन विभाग में विभिन्न सरकारी पदों पर फर्जी नियुक्ती पत्र देकर भर्ती कराया जा रहा है और बेरोजगार युवक-युवतियों को इस जाल में फंसाने के लिये नौकरी का लालच के लिए वाट्सअप ग्रुप भी चलाया जा रहा है। जिसकी जानकारी साइबर क्राइम पुलिस ने ली तो पता चला कि आरोपी उत्तराखण्ड के बेरोजगार युवक-युवतियों को विभिन्न प्रोजेक्ट जैसे नमामी गंगे, उत्तराखण्ड पावर कार्पोरेशन और वन विभाग में वन बीट अधिकारी, वन दरोगा, लोवर डिविजन क्लर्क, एकाउन्टेट आदी के पदों पर भर्ती करने का लालच देकर ठगी कर रहे हैं। दोनों खुद को वन विभाग का अधिकारी बताते थे और ठगी करते थे।

एक आरोपी देहरादून से गिरफ्तार, बरामद कई साक्ष्य

वहीं पुलिस ने साईबर तकनीक का प्रयोग करते हुए सरगना सुमितानन्द भट्ट पुत्र सीताराम भट्ट निवासी ग्राम ककोला पो.ऑ. परकंडी, रुद्रप्रयाग को गिरफ्तार किया जो की वर्तमान में विपुल वर्मा निवासी अजबपुर खुर्द, थाना नेहरु कालोनी, जिला देहरादून, बनकर रह रहा था। तलाशी लेने पर आरोपी के कब्जे से वन विभाग में विभिन्न पदों पर वन विभाग के फर्जी लैटर पैड पर दर्जनों युवक युवतियों के नाम जारी नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज, शैक्षिक प्रमाण पत्र, विभिन्न बैंकों के खातों से सम्बन्धित चैक बुक, एटीएम कार्ड, डोंगल, रबर मुहर वन विभाग उत्तराखण्ड सरकार व उत्तराखण्ड पावर कार्पोरेशन, कैमरा आदि बरामद हुआ।

पढ़े लिखे युवक की ली मदद, आरोपी विज्ञान से परास्नातक

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वो अपने साथियों के साथ मिलकर ठगी करता था। बताया कि उसका एक साथी टिहरी गढ़वाल निवासी विक्की सिंह राणा भी इसमे शामिल है जिसका वन विभाग में अच्छी जानकारी है। बताया कि विक्की सिंह ने विज्ञान परास्नातक (वानिकी) में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। आरोपी ने बताया कि उसी की मदद से उन्होंने राज्य के बेरोजगार युवक-युवतियों को वन विभाग और विभिन्न पदों नौकरी का लालच दिया औऱ पद के हिसाब से नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख से 5 लाख रुपये कीठगी की।

दिखावे के लिये बनाया वाट्सअप ग्रुप, दी जाती थी ट्रेनिंग

आरोपी ने बताया कि दिखावे के लिये उनको वाट्सअप ग्रुप में जोडकर उनको नौकरी और ट्रैनिंग के सम्बन्ध में जानकारी देते थे औऱ नियुक्ति पत्र जारी किया करते थे जिन युवक युवतियों ने अभियुक्त पर नौकरी नही दिलाने पर दबाब बनाया उनको सैलरी के नाम पर 15 हजार से 18 हजार रुपये महीने के हिसाब से वेतन  भी दिया गया। अपराधियों के झाँसे में बेरोजगारो की अधिक संख्या हो जाने पर उनके द्वारा दो चरणों में देहरादून में वन विभाग की ट्रेनिंग भी दिलायी गयी।

पूछताछ के बाद दोस्त को भी किया गिरफ्तार

वहीं पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में उसके साथी विक्की सिंह राणा पुत्र धनवीर सिंह राणा निवासी 20 अमकोटी, पौड़ी गढ़वाल हाल किरायेदार मनीष लेखवार, निकट चिल्ड्रन पब्लिक स्कूल ढ़ालवाला, थाना मुनि की रेती, जनपद टिहरी गढ़वाल को ढालवाला, ऋषिकेश से गिरफ्तार किया। आरोपी विक्की सिंह राणा ने पूछताछ में बताया कि वो दोनों बेरोजगार युवक युवतियों को खुद को वन विभाग में प्रमुख वन संरक्षक और सहायक वन संरक्षक बनाकर ठगते थे। यहां तक की अपनी गाडियों के लिये भी नेम प्लेट भी बनायी। जिसे पुलिस ने बरामद किया। बरामद नेम प्लेट में वन विभाग का लोगो और एसीए मुख्यालय देहरादून लिखा है।

अब तक की 25 लाख से अधिक की ठगी

आरोपियों ने खुलासा किया कि अभी तक उन्होंने कुल मिलाकर युवक-युवतियों से नौकरी के नाम पर 25 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है। पुलिस अब इस गैंग के बारे में जानकारी जुटाने में लग गई है औऱ साथ ही कहां कहा किन किन से कितनी ठगी की इसकी भी जानकारी जुटाने में पुलिस लगी है। फिलहाल आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश कर न्यायालय के आदेशानुसार जिला कारागार देहरादून में भेज दिया गया है।

आरोपियों से बरामद माल

साइबर पुलिस को आऱोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटाप, नेम प्लेट, एटीएम कार्ड, चैक बुक, वन विभाग में नियुक्ति सम्बन्धित फर्जी दस्तावेज, डोंगल, रबर मुहर वन विभाग उत्तराखण्ड सरकार व उत्तराखण्ड पावर कार्पोरेशन, कैमरा आदि बरामद हुआ है।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम पता

1- सुमितानन्द भट्ट पुत्र सीताराम भट्ट निवासी ग्राम ककोला पो0ऑ0 परकंडी, रुद्रप्रयाग जनपद रुद्रप्रयाग, हाल किरायेदार  विपुल वर्मा पुत्र श्री महेन्द्र सिंह निवासी अजबपुर खुर्द, थाना नेहरु कालोनी, जिला देहरादून, उम्र- 25 वर्ष ।

2- विक्की सिंह राणा पुत्र धनवीर सिंह राणा निवासी 20 अमकोटी, पौड़ी गढ़वाल हाल किरायेदार मनीष लेखवार, निकट चिल्ड्रन पब्लिक स्कूल ढ़ालवाला, थाना मुनि की रेती, जनपद टिहरी गढ़वाल, उम्र लगभग- 29 वर्ष ।

गिरफ्तारी टीम में शामिल अधिकारी-कर्मचारी

01-  अंकुश मिश्रा, पुलिस उपाधीक्षक, साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन

02-निरीक्षक पंकज पोखरियाल (साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन )

03-उपनिरीक्षक राजेश ध्यानी (साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन )

04- मुख्य आरक्षी प्रो0 सुरेश कुमार (साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन )

05- आरक्षी श्रवण कुमार (साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन )

06- आरक्षी मुहम्मद उस्मान

07- आरक्षी आकाश कौशिक

08- आरक्षी चालक सुरेन्द्र कुमार

09- आरक्षी चालक कुलदीप रौतेला

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here