उत्तराखंड : 25 साल बाद चला फर्जी नौकरी का पता, अब जाएगा जेल!

किच्छा: फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे शिक्षा विभाग में नौकरी पाने वाले एक शिक्षक पर अब कानूनी शिकंजा कस गया है। शिक्षा विभाग के अफसरों की तरफ एक शिक्षक के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया है। पुलिस अब शिक्षक को गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले भी उत्तराखंड में फर्जी डिग्रियों से और प्रमाण पत्रों से शिक्षक बनने में कई मामले सामने आ चुके हैं।

पुलिस ने इंटरमीडिएट का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाने वाले सहायक अध्यापक पर धारा 420 के तहत केस दर्ज कर लिया है। आरोपी शिक्षक ग्राम नौगंवा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में उर्दू सहायक अध्यापक के पद पर तैनात था। शिक्षा विभाग द्वारा अध्यापक को उनके पद से पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। उपखंड शिक्षा अधिकारी गुंजन अमरोही ने पुलिस को तहरीर देकर कहा मंसूर अहमद पुत्र जहूर अहमद निवासी लाइन नं 15 आजाद नगर हल्द्वानी की 12 अक्टूबर 1995 को राप्रावि ग्राम नौगंवा में बतौर उर्दू सहायक अध्यापक हुई थी।

मंसूर की सेवा पंजिका में अंकित विवरण के अनुसार शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट 1987 माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश है। मंसूर के इंटरमीडिएट प्रमाण पत्र के संबध में सत्यापन की आख्या क्षेत्रीय सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय से ली गई। उनके कार्यालय से 19 जून 2020 को जबाव मिला मंसूर का परीक्षाफल डब्ल्यूबी सूची के अंतर्गत रद्द किया गया है। अंकपत्र परिषद कार्यालय से जारी नहीं किया गया। अभिलेखों के अनुसार मंसूर का इंटरमीडिएट का परीक्षा फल निरस्त है। जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा ऊधमसिंह नगर ने अपने कार्यालय से 26 जून 2020 को मंसूर को 10 जुलाई 2020 को अपना पक्ष रखने के लिए निर्देशित किया।

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