उत्तराखंड : देखिये बदहाल और मजबूर कोरोना वॉरियर, 108 की अस्पताल में एंट्री बैन, क्या कार्रवाई करेगी सरकार ?

ऊधम सिंह नगर में एक ऐसा मामला सामने आया जो इस कोरोना काल मे स्वास्थ्य महकमे को कटघरे में खड़ा कर रहा है। मामला मानवता को तो शर्मसार करने वाला है ही, साथ ही सिस्टम को भी कठघरे में खड़ा कर रहा है। एक जमाती कोरोना मरीज़ को लाने वाली इमरजेंसी 108 सेवा को गदरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी ने स्वास्थ्य केंद्र से बाहर का रास्ता दिखा दिया। भले ही कोरोना मरीज़ ठीक होकर घर चला गया हो, लेकिन आज भी उस मरीज़ को लाने वाली 108 इमरजेंसी सेवा की घर वापसी नही हुई है।

दूसरों की छत पर बीत रही रात

गदरपुर के 108 कर्मचारियों को कोरोनावायरस का मरीज लाना उस वक्त भारी पड़ गया, जब मरीज को छोड़ने के बाद गदरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 108 एंबुलेंस को अस्पताल के अधिकारियों ने खड़ा करने से मना कर दिया। जिसके चलते 108 कर्मचारियों को सरकारी अस्पताल के बाहर एंबुलेंस को खड़ा करना पड़ रहा है इतना ही नहीं रात में ड्यूटी के दौरान समय बिताने के लिए इन 108 कर्मचारियों को दूसरों की छत पर रात बितानी पड़ रही है। बाजपुर में जमात से लौटे जमातीयों को अस्पताल ले जाने के लिए गदरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से 108 की गाड़ी को बुलाया गया था।

एंबुलेंस को अस्पताल से बाहर किया

करोना पॉजिटिव मरीज को छोड़ने के बाद 108 एंबुलेंस को पूरी तरह से सैनिटाइज भी किया गया था। सैनिटाइजेशन के बाद 108 एंबुलेंस गदरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जैसे ही पहुंचती है वैसे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी द्वारा एंबुलेंस को अस्पताल से बाहर ले जाने के लिए 108 कर्मचारियों को आदेश दिया जाता है। जिसके बाद से 108 कर्मचारी सड़क किनारे एंबुलेंस को खड़ा करके अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। जहां तपती धूप के नीचे खड़ी एंबुलेंस गाड़ी दोपहर में पूरी तरह गर्म भी हो जाती है लेकिन 108 कर्मचारियों की सुध लेने वाला कोई भी नहीं है। इतना ही नहीं है कर्मचारियों को खाना खाने के लिए सड़क किनारे जमीन पर बैठकर खाना खाना पड़ रहा है। कार्यवाही की मांग को लेकर 108 कर्मचारियों ने उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत भी कराया लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

अधिकारियों को ही झूठी जानकारी दी 

108 कर्मचारियों के सामने आ रही परेशानियों को लेकर जब स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. संजीव सरना से बात की गई तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। जिसके बाद मामले का संज्ञान स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कराया गया तो उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी से फोन पर संपर्क साधा, जिस पर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी ने अधिकारियों को ही झूठी जानकारी दे डाली। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 108 को खड़ा करने के लिए टीन शेड दिया गया है। लेकिन जिस जगह पर 108 की एंबुलेंस खड़ी होनी चाहिए थी वहां सरकारी अस्पताल में ड्यूटी करने आ रहे चिकित्सकों की निजी गाड़ियां खड़ी हो रही हैं और पुलिस के जवान ड्यूटी पर तैनात हैं। वही एसीएमओ अविनाश खन्ना ने कहा कि मामले की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्राप्त हुई है। जिसकी त्वरित जांच कराई जाएगी और कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

सड़क किनारे ही खड़ी 108

सड़क पर पड़े घायलों को उठाने के लिए सबसे पहले 108 को याद किया जाता है, लेकिन आज 108 खुद सड़क किनारे ही खड़ी हुई है। इतना ही नहीं 108 कर्मचारी इतने बेबस और लाचार हो गए हैं कि उन्हें सरकारी अस्पताल के बाहर दूसरों की छत पर रात बिताने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिसका कारण जानकर आप खुद हैरान हो जाएंगे। इतनी परेशानियों के बाद भी 108 के कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं है तो वहीं विभाग के अधिकारी जांच के बाद कार्यवाही की बात कर रहे हैं। देखने की बात है कि कब तक अधिकारी अपनी जांच पूरी कर पाएंगे और कब 108 को सरकारी अस्पताल में जगह मिल पाएगी।

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