उत्तराखंड : मासिकधर्म के दौरान घर से अलग रहती हैं इस गांव की महिलाएं, ऐसे हुआ खुलासा

चम्पावत  : जिले के दुर्गम इलाके में मौजूद घुरचुम गांव से इंसानियत को शर्मसार करने वाली मामला सामने आया है…जहां पिछले लंबे समय से गांव की महिलाओं को मासिकधर्म के दौरान अलग माहवारी भवन (रजस्वला केंद्र) में मजबूरी में रहने का वाकया सामने आया है.

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

दरअसल यह मामला तब सामने आया जब घुरचुम गांव के कुछ लोग जिलाधिकारी रणवीर सिंह चौहान के पास इस रजस्वला केंद्र की मरम्मत के लिए प्रस्ताव लेकर पहुंचे थे…जिलाधिकारी के सामने आए इस प्रस्ताव ने जिलाधिकारी को भी हैरान कर दिया.

जानकारी के मुताबिक दरअसल गुड़गांव में पिछले लंबे समय से महामारी के दौरान महिलाओं को अलग भवन में मजबूरन रहना पड़ता था जिसके लिए की बाकायदा यहां एक केंद्र भी बनाया गया था लेकिन ये भवन कब और किस योजना के तहत बनाया गया यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है और खुद जिलाधिकारी ने इस भवन पर जांच के आदेश दे दिए हैं..

महिला-बाल विकास मंत्री रेखा ने जताया दुख

वहीं दूसरी तरफ महिला सशक्तिकरण से जुड़ा ये मामला जब महिला-बाल विकास मंत्री रेखा के पास पहुंचा तो उन्होंने भी इस मामले पर दुख जताया. रेखा आर्य बताया कि ये घटना चंपावत के दुर्गम में मौजूद घुरचुम गांव की है और जानकारी मिलि है कि वहां महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अलग भवन में रखा जाता है जिसे रजस्वला केंद्र के नाम से चलाया जाता है.

तत्काल प्रभाव से इस केन्द्र को प्रतिबंधित करने का आदेश 

जिस पर मंत्री रेखा आर्य ने तत्काल प्रभाव से इस केन्द्र को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है और कहा कि ये जांच का विषय है कि ये केंद्र किस फंड के तहत बना है और जिस योजना या फंड के तहत ये केंद्र बना है उसी के तहत इस भवन का उपयोग किया जाय, अन्यथा रजस्वला महिला के लिए बिल्कुल भी इस केन्द्र का प्रयोग ना किया जाय.

वहीं रेखा आर्य ने कहा कि इस तरह से महिला की माहवरी के साथ भेदभाव करना सही नहीं है और इसके लिए जागरुकता की आवश्यक्ता है.

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