उत्तराखंड : बेटी ने उठाई आवाज, पिता को दिखाई राह और रुकवाई अपनी शादी

देहरादून : आजकल बेटियां समाज में पुरुषों से पीछे नहीं है बल्कि कंधे से कंधा मिलाकर समाज में आगे बढ़ रही हैं. घर के काम से लेकर बाहर नौकरी करने और ऊंचे पद पर भी बेटियां आसीन है. देश के विकास में बेटियों की अहम भूमिका रही है। बात किसी भी विभाग की कर लें बेटियां अफसर बन देश और राज्य की बागडोर संभाले हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं अभियान का असर अब देखने को मिलने लगा है खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिलने लगा है।

जी हां ताजा मामला देहरादून जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर जनजातीय ग्रामीण अंचल का है। जहां 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 साल की एक छात्रा की उसके परिजनों ने शादी तय कर दी लेकिन लड़की शादी के खिलाफ थी। क्योंकि उसे आगे पढ़लिखर कर कुछ बनना था , कुछ करना था। छात्रा ने परिवार के इस फैसले का विरोध किया। लेकिन परिवार वाले उसकी शादी कराना चाहते थे जबकि किशोरी की एक ही रट थी कि वो अभी नाबालिग है और बालिग होने पर ही शादी करेगी।

मामला पहुंचा प्रशासन के पास,ये हुआ फैसला

जब छात्रा के घरवाले नहीं मानें तो उसने बहादुरी दिखाते हुए एक बड़ा कदम उठाया औऱ एक शिक्षिका की मदद ली। जिसके बाद ये मामला तहसील प्रशासन तक पहुंचा। इसके बाद कालसी के तहसीलदार शक्ति प्रसाद उनियाल ने छात्रा के परिवारीजनों के साथ ही बाल विकास परियोजना अधिकारी कालसी, महिला शक्ति केन्द्र जिला समन्वयक, महिला थाना पुलिस, बाल विकास सुपवाइजर, क्षेत्रीय पटवारी और ग्राम प्रधान को साहिया थाने बुलाया। चर्चा के बाद छात्रा की शिकायत की मौके पर जांच की गई तो बात सही निकली। जिसके बाद सभी की मौजूदगी में तय किया गया कि छात्रा अभी नाबालिग है, जो किसी दशा में शादी नहीं करना चाहती है। इसलिए उस पर कोई दबाव न डाला जाए।

पिता को दिखाई सही राह

वहीं किशोरी के पिता ने लिखकर दिया कि वह अपनी बेटी को अपने संरक्षण में घर अपनी जिम्मेदारी पर ले जा रहा हैं। बालिग होने पर वह उसकी सहमति से ही रीति रिवाज के साथ शादी कराएंगे। जिसके बाद छात्रा ने खुशी जाहिर को और एक पिता को बाल विवाह करने से रोका और सही राह दिखाई।

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