सर्जिकल स्ट्राइक की पहली वर्षगांठ भूली सरकार लेकिन 2019 से ठीक पहले शौर्य दिवस

देहरादून(मनीष डंगवाल) : आज से दो साल पहले भारतीय सेना के रंणबाकुंरो ने पकिस्तान की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था,जिसमें कई आंतकियों का खात्मा भारतीय सैनिकों ने किया था…सर्जिक स्ट्राइक के दो साल पूरे होने पर केंद्र सरकार के साथ भाजपा सर्जिक स्ट्राइक के दो साल पूरे होने को शौर्य दिवस के रूप में मना रही है। लेकिन कांग्रेस इसे सेना का राजनीतिकरण बता रही है।

सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ 

29 सितम्बर 2016 को भारतीय सेना के द्धारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के एक साल पूरे होने पर भले ही केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा के द्धारा कोई कार्यक्रम न किया गया हो लेकिन सर्जिक स्ट्राइक के दो साल पूरे होने पर भाजपा के साथ केंद्र की मोदी सरकार भव्य रूप में सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ माना रही है।

उत्तराखंड में देहरादून और हल्द्धानी में दो बड़े कार्यक्रम

उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड में भाजपा ने देहरादून और हल्द्धानी में दो बड़े कार्यक्रम सर्जिकल स्ट्राइक के दो साल पूरे होने पर शनिवार को रखे हैं ,जिसमें भाजपा पूर्व सैनिक और शहीद परिजनों को सम्मानित करेगी…बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष भट्ट का कहना कि दो बड़े कार्यक्रमों के आयोजन के साथा भाजपा के कार्यकर्ता घर-घर जाकर भी पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित करेंगे।

लोकसभा चुनाव से पहले सौनिक पृष्ठ भूमि के वोट बैंक पर सेंध मारी

केंद्र सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक को मनाने के लिए शौर्य दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है,जिससे साफ होता है कि भाजपा सर्जिक स्ट्राइक के दूसरी वर्षगांठ को भव्य रूप में मनाकर लोकसभा चुनाव से पहले सौनिक पृष्ठ भूमि के वोट बैंक पर सेंध मारी की कोशिश कर रही है,जिससे कांग्रेस भी परेशान है,कांग्रेस का कहना कि भाजपा की केंद्र सरकार ने सेना का राजनैतिक करण कर करना चाहती है।

कांग्रेस ने हमेशा अपने लिए काम किया-सीएम

कांग्रेस के सवालों पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि कांग्रेस ने हमेशा अपने लिए काम किया है, इसलिए कांग्रेस इस तरह की बात करती है…भारतीय सेना के आदम्य साहस का ही परिचय था कि भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना में घुसकर आंतकियों को मार गिराया था, इसलिए सेना और सौनिकों के सम्मान लिए सर्जिक स्ट्राइक शौर्य दिवस के रूप में मानाया जा रहा है।

पहली वर्षगांठ को भूली सरकार लेकिन 2019 से ठीक पहले शौर्य दिवस

सैनिकों का सम्मान कोई गलत बात नहीं लेकिन सर्जिक स्ट्राइक की पहली वर्षगांठ को भूलकर दूसरी वर्षगांठ को भव्य रूूप में मानाये जाने को लेकर एक सवाल भाजपा पर तो जरूर उठता है कि कहीं 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सैनिकों के वोट बैंक पर बीजेपी सेंधमारी तो नहीं कर रही है,लेकिन ये तो 2019 के चुनावी नतीजे की बताएंगे आखिर बीजेपी की इस कोशिश का पार्टी को कितना फायदा हुआ।

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