लोकसभा के साथ अगर होते विधानसभा चुनाव तो दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाती कांग्रेस!

देहरादून : उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के नतीजो से कांग्रेस की जमीन खिसकती हुई नजर आ रही है. लोकसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डाले तो कहा जा सकता है कि प्रदेश में वर्तमान समय में कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले और भी ज्यादा कमजोर नजर आ रही है.

आजादी के बाद इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा 

पूरे देश में इस समय कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. जी हां 2014 के चुनावी नतीजों के 2019 के नतीजों पर गौर फरमाएं तो आजादी के बाद इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब कांग्रेस लगातार दो बार लोकसभा चुनाव बुरी तहर से हारी हो. देश के साथ उत्तराखंड में भी कांग्रेस का हाल कुछ ठीक नहीं है. उत्तराखंड में कांग्रेस को अपनी जमीन बचना मुश्किल नजर आ रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में 5 सीटें हारना फिर 2017 के विधान सभा चुनाव में बुरी तहर से भाजपा से पाराजित होना है और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 के लोकसभा चुनाव से भी बुरी हार हारना कांग्रेस के लिए ये उत्तराखंड की जनता के जनादेश से ये संदेश है कि जनता का न तो कांग्रेस पर भरोसा है न उनके नेताओं पर.

राजनैतिक पंण्डित का गणित- कांग्रेस दहाई के आंकड़ा को भी पार नहीं कर पाती

उत्तराखंड कि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कैसे भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ पाएंगी. वह भी तब जब इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 70 विधानसभा सीटों में से केवल 5 सीटों पर भाजपा को मात दे पाए हैं। इसलिए राजनैतिक पंण्डित गणित लगा रहे है कि अगर लोकसभा चुनाव के साथ उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हुआ होता तो कांग्रेस दहाई के आंकड़ा को भी पार नहीं कर पाती. इस समय कांग्रेस के पास प्रदेश में 11 विधायक है जिनमे से 4 विधायक ही अपनी विधानसभा में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को आगे रख पाए हैं, जबकि एक भाजपा विधायक के क्षेत्र में कांग्रेस आगे रही है।

कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और पीएम मोदी के रूप में प्रधानमंत्री का चेहरा है -अजय भट्ट

कांग्रेस को चारों खाने चित्त करने को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नैनीताल लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित सांसद अजय भट्ट का कहना कि उत्तराखंड में पिछले 5 सालों की कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और पीएम मोदी के रूप में प्रधानमंत्री का चेहरा है जिस वजह से भाजपा 70 में से 65 सीटों पर आगे रही।

कांग्रेस के 11 विधायक चुनाव जीतते हुए मोदी लहर को अपने विधानसभा क्षेत्रों में आने से बचा गए

2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस के 11 विधायक चुनाव में जीतते हुए मोदी लहर को अपने विधानसभा क्षेत्रों में आने से बचा गए थे, लेकिन इस बार मोदी की सुनामी में 11 में 7 विधायक मोदी की सुनामी को रोक नहीं पाएं. प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के विधानसभा क्षेत्र चकराता,कांग्रेस विधायक ममता राकेश के विधानसभा क्षेत्र भगवानपुर मंगलोर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुदीन और पिरान कलियर के कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद ही ऐसे विधायक हैं जो 2017 के बाद अपने-अपने गढ़ में लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को मात दे पाए हैं।

भाजपा विधायक सुरेश राठौर तो पार्टी को ज्यादा वोट नहीं दिला पाए

वहीं ज्वालापुर से भाजपा विधायक सुरेश राठौर ऐसे एक मात्र भाजपा विधायक है जो अपने क्षेत्र में पार्टी को ज्यादा वोट नहीं दिला पाएं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कांग्रेस के निराश जनक प्रदर्शन को लेकर कहना कि कांग्रेस प्रदेश में कमजोर नहीं है,जो लोग ये सोच रहे है कि कांग्रेस उत्तराखंड में कमजोर है उन्हे निकाय चुनाव के नतीजे देखलेने चाहिए।

कुल मिलाकर कांग्रेस भले ही निकाय चुनाव के नतीजो को याद कर खुद को दिलासा दिला रही हो कि कांग्रेस उत्तराखंड में मजबूत है,लेकिन कांग्रेस को उत्तराखंड में मजबूत होने के लिए बहुत दम दिखाना होगा नहीं तो 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के लिए नतीजे अनकुल रहने वाले नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here