सबूत : उत्तराखंड के CM चौकीदार लेकिन राजशाही माला राजलक्ष्मी चौकीदार बनने को नहीं तैयार

देहरादून। लोकसभा चुनाव के महासंग्राम के बीच जहां राजनैतिक दलों के बीच जुबानी हमले तेज हो गए हैं वहीं भाजपा कांग्रेस के बीच इन दिनों चौकीदार शब्द पर ज्यादा बहस छिड़ी हुई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जहां प्रधानमंत्री को चौकीदार चोर कह कर पुकारे रह है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को ये संदेश दे रहे हैं उनका चौकीदार चोर नहीं ईमानदार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो मैं भी चैकीदार का ऐसा कैंपेन चलाया कि भाजपा कार्यकर्ता और आम जनता भी अपने ट्विटर अकाउंट पर ‘चैकीदार’ लिख कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खडे़ नजर आ रही है। लेकिन भाजपा आम कार्यकर्ता तो इस मुहिम का हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम के चंद मिनटों में भागीदार बन गया,लेकिन भाजपा के वो बड़े नेता अभी इस मुहिम का हिस्सा उत्तराखंड में नहीं बने हैं जो मोदी लहर में सांसद और प्रदेश सरकार में मंत्री तक बन गए.

 क्या पीएम मोदी को अपना नेता नहीं मानते ये मंत्री-विधायक

2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर का ही असर था कि भाजपा की 57 सीटें उत्तराखंड में आ गई लेकिन उस मोदी लहर में जीत कर जो विधायक-मंत्री बन गए वो अपने प्रधानमंत्री की ही मुहिम का हिस्सा नहीं बन रहे हैं जिससे सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर क्या उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल जो कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं वह मोदी का अपना नेता नहीं मानते हैं और अगर अपना नेता मानते हैं तो फिर ट्विटर अकाउंट पर अपने नाम से पहले चौकीदार क्यों नहीं लिखते.

चौकीदार बनने में रानी भी पिछे

टिहरी लोकसभा सीट पर भाजपा ने फिर से माला राज्यलक्ष्मी शाह को प्रत्याशी बनाया है. पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह का विश्वास जीतने में माला राज्यलक्ष्मी शाह टिकट पाने में कामयाब रही है लेकिन माला राज्यलक्ष्मी शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पहल को अपनाने को तैयार ही नहीं है जिसे भाजपा का जमीनी कार्यकर्ता और आम जनता तक अपनाने को तैयार है. जी हां माला राज्यलक्ष्मी शाह ने अभी तक अपने ट्विटर एंकाउट पर अपने नाम से पहले चौकीदार नहीं लगाया है, जिससे सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या माला राज्यलक्ष्मी शाह को इस अभियान की जानकारी नहीं है और अगर अभियान की जानकारी है तो क्यों वह चौकीदार शब्द से परहेज कर रही है. वह भी तब जब भाजपा ने मैं भी चैकीदार हूं को चुनावी नारा बना दिया है।

राजशाही का रौब तो नहीं है वजह

उत्तराखंड की 5 लोकसभा सीटों पर जिन 5 उम्मीदवारों को पार्टी ने मैदान में उतारा है उनमें माला राज्यलक्ष्मी शाह ही एक मात्र ऐसी प्रत्याशी है जिन्होने अपने ट्वीटर अकाउंट पर अपने नाम से पहले चौकीदार नहीं लिखा है. बाकी 4 भाजपा सांसद प्रत्याशियों ने अपने नाम से पहले ट्वीटर एंकाउंट पर चौकीदार लिखा हुआ है।

माला राजलक्ष्मी के माथे पर न तो चौकीदार का पट्टा न ट्विटर अकाउंट में

खास बात ये है कि आज जब माला राज्यलक्ष्मी शाह के नामांकन से पहले भाजपा महानगर कार्यालय में जनसभा का कार्यक्रम आयोजित किया गया उसमें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भाजपा विधायकों और कार्यकर्ताओं के माथे पर भी मैं भी चौकीदार का स्टीगर देखने को मिला लेकिन माला राज्यलक्ष्मी शाह के माथे से यहां पर चौकीदार का पट्टा नही था. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर जिस नारे के साथ भाजपा लोकसभा चुनाव के समर में कूद चुकी है उस नारे का पालन भाजपा प्रत्याशी ही नहीं करेंगे तो फिर भाजपा को वोट मिलेंगे कैसे। ऐसे तो नहीं है कि माला राजलक्ष्मी शाह राजशाही परिवार से हैं औऱ इसलिए वो अपने नाम के आगे चौकीदार लिखना पसंद नहीं कर रही है.

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