उत्तराखंड : सीएम ने दिए थे लिखित निर्देश, हरक ने किया इंकार, ठोकरें खा रही योगा एंबेसडर

देहरादून।  उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार में सचिवालय में बैठे अधिकारी भी मुख्यमंत्री के निर्देशों को नजर आंदाज कर देते हैं। जी हां ये हम नहीं मुख्यमंत्री के द्धारा उत्तराखंड की योगा एम्बेंसडर दिलराजप्रीत कौर की संविदा अवधि बढ़ाने और उनके रूके हुए मानदेय को जारी करने के निर्देश के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई न होने को लेकर कहा जा रहा है।

सीएम ने दिए थे निर्देश, अधिकारियों ने उड़ाई धज्जियां

बता दें कि 29 नवम्बर 2019 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने योगा एम्बेंसडर दिलराजप्रीत कौर की संविदा अवधि बढ़ाने और उनके रूके हुए मानदेय को जारी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन मुख्यमंत्री के आदेश को दो माह बीतने को है फिर भी दिलराजप्रीत कौर की न तो संविदा अवधि बढ़ी है और न ही उनका रूका हुआ मानदेय जारी हुआ है। मुख्यमंत्री के लिखित आदेश के बाद भी सचिवालय के अधिकारियों ने दिलराजप्रीत कौर को सचिवालय के कई चक्कर लगा दिए हैं, लेकिन दिलराजप्रीत कौर की संविदा अवधि बढ़ाएं जाने और उनका रूका हुआ वेतन की फाइल इधर से उधर घुम रही है। दिलराजप्रीत कौर का कहना है कि वह सचिवालय के कई चक्कर लगा चुकी है फिर भी उनका न तो मानदेय मिल रहा है न ही संविधा अवधी बढ़ाई जा रही है। फिर भी वह उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रही है।

30 जून 2018 से अभी तक नहीं मिला वेतन-दिलराज प्रीत कौर

दिलराज प्रीत कौर का कहना कि 30 जून 2018 से उनका वेतन अभी तक नहीं मिला है,जिस वजह से वह काफी परेशान है। बता दें कि 21 जून 2019 को अंतराष्ट्रीय योगा दिवस के दिन राज्यस्तरीय कार्यक्रम में दिलराजप्रीत कौर ने योगा का परफारमेंस भी दी थी जिसके बाद मुख्यमंत्री ने उनकी योगा परफारमेंस का सहारा था और उसी समय दिलराजप्रीत कौर ने मुख्यमंत्री के संज्ञान में संविदा अवधि बढ़ाने और रूका हुआ वेतन मिलने की मांग की थी,जिस पर मुख्यमंत्री ने दिलराजप्रीत कौर को आश्वासन भी दिया था. यही नहीं योगा दिवस पर हर साल दिलराजप्रीत कौर राज्यस्तरीय कार्यक्रम में परफारमेंस देती है।

आयुष मंत्री हरक सिंह रावत ने किया इंकार

दिलराजप्रीत कौर की पीड़ा को लेकर जब आयुष मंत्री हरक सिंह रावत से हमने सवाल किया तो हरक सिंह रावत ने कहा कि दिलराजप्रीत की संविदा अवधि बढ़ाने की फाइल उनके पास आई है,लेकिन उसमेे रूके हुए मानदेय का जिक्र नहीं है, जिसपर वह आयुष सचिव से बात करेंगे। कुछ दिनों से वह बाहर थे, जल्द ही वह इस पर निर्णय लेंगे। साथ ही हर साल संविदा अवधि बढ़ाने की फाइल शासन की मंजूरी के लिए न पहुंचे इसके लिए वह उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय को ही अधिकारी देने की सोच रहे हैं ताकि दिलराजप्रीत कौर को संविदा अवधि बढ़ाने के लिए चक्कर न काटने पड़े।

सीएम ने दिए थे लिखित निर्देश, हरक का इंकार

बेशक हरह सिंह रावत दिलराजप्रीत कौर की पीड़ा का स्थाई समाधान निकालने की बात कर रहे हैं लेकिन हरक सिंह का कहना कि उनके पास केवल संविदा अवधि बढ़ाने की फाइल आई है, जबकि मुख्यमंत्री ने संविधा अवधि बढ़ाने और रूके हुए वेतन को जारी करने के निर्देश लिखित में दिए हुए है,ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि जब मुख्यमंत्री ने दो बिंदुओं के समाधान करने के निर्देश दिए थे तो फिर सचिवालय में बैठे अधिकारी एक ही मांग की फाईल क्यों आगे बढ़ा रहे है,और ऐसा करने से ऐसे अधिकारियों को क्या हासिल होगा ये भी सवाल है। लेकिन मानवीय पहलू से सोचे तो अगर दिलराजप्रीत कौर जिसने योगा के क्षेत्र में देश से लेकर विदेशों में 100 से ज्यादा  मेडिल हासिल किए है, यहां तक कि ऐशियन चैंपियन 2012 में वह गोल्ड मेडिल और 10 से ज्यादा अंतराष्ट्रीय मेडिल हासिल कर चुकी हैं। अगर वह उत्तराखंड के किसी नेता या अधिकारी के बेटी होती तो फिर क्या उसे इसी तरह चक्कर नौकरी और वेतन के लिए काटने पड़ते ये अपने आप में सवाल है। ऐसे में देखना ये होगा कि जब उत्तराखंड के अधिकारी मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन गंभीरता से नहीं कर रहे है तो क्या

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