रेफर सेंटर बना ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का CHC, महिला ने एंबुलेंस में दिया बच्चे को जन्म

चमोली : उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल है औऱ चिकित्सा सुविधा कैसी है ये जानना है तो ये खबर काफी है।उत्तराखंड में अधिकतर अस्पतालों में मरीज को रेफर किया जाता है और इस बीच अब तक कई मरीजों की जान जा चुकी है। उत्तराखंड के कई अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल बेहाल है। पहाड़ों में अधिकतर परेशानी बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है। सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्म कालीन राजधानी तो घोषित कर दिया है लेकिन क्यावहां सुख सुविधाएं भी गांव के लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी इसकी आस में गांववाले हैं। गांव वाले उम्मीद कर रहे हैं कि ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के बाद उन्हें हर सुख सुविधाएं मिलेंगी।

ताजा मामला चमोली, गैरसैंण के सारकोटगांव का है जहां कि निवासी पूरण सिंह सिंह की गर्भवती पत्नी गणेशी देवी(31) की बुधवार को तबीयत खराब हो गई। परिवार वालों ने 108 को फोन कर बुलाया जहां से 108 गर्भवती महिला को 11 बजे सीएचसी गैरसैंण लेकर पहुंचा। लेकिन डॉक्टरों ने ये कहकर की गर्भवती के पेट में बच्चे को उल्टा है, महिला को हायर सेंटर रेफर कर दिया। तभी परिवार वालों महिला को हायर सेंटर ले जा रही रहे थे कि महिला ने सीएचसी से कुछ ही दूरी पर डांगीधार के पास 108 में ही बच्चे को जन्म दिया। एंबुलेंस में मौजूद फार्मेसिस्ट और आशा कार्यकर्ता ने गर्भवती का प्रसव कराया।

जानकारी मिली है कि सीएचसी से अधिकतर गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। सीएचसी मात्र रेफर सेंटर बनकर रह गया है। इससे पहले भी एक महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया था जिसके बाद महिला ने 14 किमी दूर मेहलचौरी-पांडवाखाल के बीच नवजात को जन्म दिया। इतना ही नहीं बीते महीने ही एक गर्भवती महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी जिसके बाद सीएचसी में जमकर हंगामा भी हुआ था। जिस पर सीएमओ ने सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक सहित दो अन्य चिकित्सकों का स्थानांतरण अन्यत्र कर दिया गया था।

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