उत्तराखंड में बड़ा खुलासा : जिसकी हो गई 2016 में मौत उसका 2019 में बनाया फिटनेस और मेडिकल सर्टिफिकेट

प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी कितनी बेलगाम हो चुकी है ये तो प्रदेश की जनता जानती ही है और बेलगाम अधिकारियों पर सरकार का कितना नियंत्रण है। ये जग जाहिर है…वहीं ऐसे बेलगाम अधिकारी सारे नियम कानून कायदे ताक पर रखकर अपने मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं। एक ऐसा ही स्वास्थ्य विभाग का मामला मामला सामने आया है। जहां स्वास्थ्य विभाग ने 4 (07-11- 2016) साल पूर्व मरे हुए व्यक्ति का मेडिकल सर्टिफिकेट और फिटनेस सर्टिफिकेट तैयार कर दिया। प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी के बेलगाम और मनमाने ढंग से कार्य को अंजाम देने के हजारों उदाहरण हैं। लेकिन ताजा मामला उधम सिंह नगर के जसपुर क्षेत्र में मात्र 2000 के लालच में स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर हितेश शर्मा ने 4 साल पहले, यानी 2016 में मृत व्यक्ति का मेडिकल सर्टिफिकेट और फिटनेस सर्टिफिकेट 2019 में तैयार कर दिया था। जब मामले की जानकारी डॉक्टर हितेश शर्मा से ली गई तो उनके द्वारा बताया गया कि सारे काम नियमानुसार किए गए हैं। कोई भी में मृत व्यक्ति कैसे आकर साइन कर सकता सकता है और कैसे आकर पर्चा बना सकता है।

डॉक्टर हितेश शर्मा को जो मामला हाईलाइट होते ही इस तरीके से झूठ बोल रहे हैं। पहले डॉक्टर हितेश शर्मा ने सूचना के अधिकार में बिंदु नंबर 2 में जवाब दिया था। 9-1-2019 को सुरेश कश्यप पुत्र श्री गोपाल सिंह नाम से कोई भी मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया था। अब तो  जांच के बाद ही पता चलेगा सूचना के अधिकार का जवाब झूठा, फिटनेस और मेडिकल प्रमाणपत्र झूठे, या फिर डॉक्टर हितेश कुमार सच बोल रहे हैं मरने के बाद सुरेश कश्यप की आत्मा डॉक्टर साहब के पास आकर कर अपना प्रमाण पत्र तैयार कर कार द्वारा परलोक चली गई। तो वहीं कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने भी डॉक्टर हितेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि डॉ हितेश कुमार पहले भी विवादों में रहते हैं और ₹2000 के लालच में इन्होंने मुर्दे का ही मेडिकल प्रमाण पत्र और फिटनेस प्रमाण पत्र तैयार कर दिया।

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