उत्तराखंड : सीएम की तारीफ करते-करते खुद नप गए भाजपा विधायक, इन्होंने घेरा

कोटद्वार : सीएम की तारीफ करते-करते भाजपा विधायक खुद नप गए। जी हां मामला कोटद्वार के पास लैंसडाउन का है। दरअसल लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप सिंह रावत ने फेसबुक पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की जमकर तारीफ की लेकिन सीएम की तारीफ करते-करते वो खुद नप गए। जी हां सोशल मीडिया पर भाजपा विधायक दिलीप सिंह रावत की पोस्ट पर एक शख्स ने उन्हें उनके काम याद दिला दिए।

शख्स का नाम रविंद्र सिंह रावत है जिसने विधायक की सीएम की तारीफ वाली पोस्ट पर सरकार के कामों और क्षेत्र में कार्यस्थिति, समस्याओं को बताकर शासन की पोल खोली. रविंद्र सिंह रावत ने लिखा कि विधायक जी मुख्यमंत्री जी की चिंता छोड, रतिभर अपनी विधानसभा लैन्सडाउन की स्थिति से भी अवगत करा देते।
1- राजकीय इंटर कॉलेज रिखणी खाल में 6 प्रवक्ताओं में और 5 सहायक अध्यापकों के पद खाली हैं प्रधानाचार्य का पद भी रिक्त है और वरिष्ठ लिपिक का पद खाली है जबकि छात्र संख्या 200 के पार है विकासखंड का केंद्रीय विद्यालय भी है माननीयों के हेलीकॉप्टर भी इसी विद्यालय के प्रांगण में उतरते हैं अभिभावक संघ के द्वारा धरना प्रदर्शन आंदोलन किए गए लेकिन आपका सहयोग ना के बराबर रहा और ना ही आपके द्वारा शिक्षकों की कमी को दूर करने का कोई प्रयास किया गया ।
2- राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान रिखणीखाल की बिल्डिंग बरसों से अपने निर्माण का बाट जोह रही है लेकिन इस भवन निर्माण में भी आपका प्रयास शून्य रहा और बच्चे रा.ई.का. रिखणीखाल के छोटे से कक्ष में पढ़ रहे हैं और आज यही आईटीआई आपकी ही सरकार में बंदी की कगार पर खड़ा है जिसको बंद करने के लिए सरकार ने घोषणा भी कर दी है।
3 – उप तहसील रिखणीखाल का क्या हाल है सारे कार्य लैंसडौन तहसील से करने पड़ रहे हैं लेकिन आज तक आपके द्वारा प्रयास नहीं किया गया कि जिस रिखणीखाल के तहसील के लिए अलग से भवन की व्यवस्था हो जबकि भूमि चयनित हो रखी है और भवन बन सके ताकि उप तहसील रिखणीखाल से ही संचालित हो सके लेकिन क्या करें दुर्भाग्य क्षेत्र का ।
4 – पॉलिटेक्निक बड़खेत सालों बीत गए हैं लेकिन स्थिति जस की तस है
5- रिखणीखाल , खीमाखेत,किल्बौखाल , मोटर मार्ग की स्थिति से आप भली-भांति अवगत हैं लेकिन पता ही नहीं चल रहा है कि सड़क में गड्ढे है या गड्ढों में सड़क है। वही हाल किमगांव बैण्ड, सुलमोडी,रेवा,छानीखाल मोटर मार्ग का है । इस सड़क को बनते बनते 8 साल बीत गए हैं लेकिन सड़क की दुर्दशा आप के विकास परक सोच को लैंसडाउन विधानसभा के मानचित्र पर दर्शाता है।

दीपक डोबरियाल ने भाजपा विधायक पर कसा तंज

वहीं एक ओर शख्स दीपक डोबरियाल ने भी भाजपा विधायक को नपा के रख दिया. लिखा कि क्या करोगे उस आयुष्मान कार्ड का जब मेरे क्षेत्र मे चिकित्सा सुविधा ही नही …मेरे लिऐ या इस क्षेत्र की जनता के लिऐ वो एक कागज का टुकड़ा मात्र या झुनझुना है।

लिखा कि ये तो आप प्रशानिक काम गिना रहे हैं ..रोजगार की दिशा में, स्वास्थ्य की दिशा में, इन्फ्रास्ट्रचर, एजुकेशन, पलायन में कोई काम हो तो बताये…कोटद्वार में डॉक्टर बैठा दिये क्या? नगर निगम क़ो कितना बजट आवंटन हुआ बता पाएंगे क्या? खनन, शराब मे सरकार की क्या रणनीति है… 2017 से पानी के बिलो मे बढ़ोतरी, बिजली के बिलो मे बढ़ोतरी, तेल मे vat की बढ़ोतरी , गाड़ियों मे state tex मे बढ़ोतरी…कहीं किसी क्षेत्र मे कुछ कम क़िया हो या डेवेलपमेंट हुआ हो तो जरूर बतायेगा।

भाजपा विधायक ने सीएम की तारीफ करते हुए लिखा था कि…

भाजपा विधायक ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि भाइयो में फेसबुक को पढ़ता हूँ परन्तु लिखता कम हूँ क्योंकि इस माध्यम का सद्पयोग करने की जानकारी मुझे कम है परंतु कई लोगो की टिप्पणी मुझे बाध्य कर रही है कि कुछ लिखकर उन्हें सन्तुष्ट करने की कोशिश करू ।कई जागरूक लोग टिप्पणी कर रहे है कि मुख्य मंत्री जी को उत्कृष्ट पुरष्कार किस बात का मिला मेरा उन बंधुओ से निवेदन है कि ठंडे दिमाग से सोचे जो कहते है कि मुख्य मंत्री जी का जीरो टोरलेन्स पर जोर है परंतु वो दिख नही रहा है ।आप थोड़ा जानकारी रखते हो तो बता दूं सरकार का बड़ी योजनाओ में जो घोटाला होता था उस पर विशेष ध्यान है पहले बड़ी मछलीयां बड़ी बड़ीअरबो रुपये की विधुत परियोजनों को अपने चहेतो को चुपचाप दे देते थे उनको ओन लाइन कर इस काला बाजार पर पूर्णतःरोक लगाई है खनन जो मुख्यतः प्रदेश का आय का स्रोत है उनकी नीलामी ओन लाइन करा कर चार गुना आय बढ़ाई है निर्माण कार्यो में समय पर कार्य न करने की आदत ओर फिर कार्य की दरों को बढ़ाने की आदत को सुधारना बहुत बड़ा कदम है जिसका उदाहरण देहरादून के डॉट काली सुरंग ,मोहकमपुर का पुल सहित प्रदेश में कई उदाहरण है जो समय से पहिले बनने के साथ ही अपनी अनुमानित लागत से कम में बने ।मेरे छेत्र में भी जैसे भैरव गढी पम्पिंग योजना जो13 साल पहिले बननी शुरू हुई थी परंतु शुरुवात में ही दम तोड़ चुकी थी मुख्यमंत्री जी ने एक झटके में धन आवंटन कर धन की बर्बादी को रोका और योजना जनवरी में लोकार्पण को तैयार है मेरे पास ऐसे कई उदाहरण है। में ये भी बताना चाहता हूँ किराष्ट्रीय राजमार्ग घोटाला हो या समाज कल्याण का वो घोटाला जो अब तक चुपचाप गरीब बच्चो व अल्पसंख्यको के छात्रों के नाम पर जो छात्रबृत्ति का पैसा कई वर्षों से खाया जाता था सज्ञान में आते ही उस पर कड़ी कार्यवाही कर रोक लगाई ये अकेली सरकार है जिसने सबसे ज्यादा भृष्ट अधिकारी जेल डालने का साहस किया नही तो अभी तक केवल खाना पूर्ति होती थी। नियुक्तियों के घोटाले आप को याद होंगे, दरोगा भर्ती घोटाला पटवारी भर्ती घोटाला ऐसे कई घोटाला होते थे परंतु सभी नियुक्तियों को लोक सेवा व कर्मचारी चयन आयोग से करवाने का निर्णय लिया ।वन रक्षक जैसा पद जिसकी नियुक्ति पहिले रेंजर ,वना धिकारी खुलेआम पैसा लेकर करते थे अब ऐसा छोटा पद या यैसे छोटे पद भी आयोग से भरने का काम इस सरकार ने किया । में आपको ऐसे कई उदाहरण दे सकता हूँ जो भ्र्ष्टाचार के खिलाफ उठाये गए ।लोगो ने बल्कि कुछ ब्लेक मेल करने वाले लोगो ने बहुत कोशिश की उनके ऊपर कीचड़ उछाल सके पर ऐसा कर न सके। स्थान्तरण एक्ट लाकर स्थारन्तरण उधोग को समाप्त करने का साहस भी त्रिवेंद्र सरकार ने किया में मानता हूँ कि अभी इसमे कई खामिया हो सकती है परंतु नीयत में खोट नही है।हाँ ये जरूर है कि मुझ जैसे विधायक नाराज है क्योंकि हम भी चाहते थे कि कर्मचारी हमारे पास आये और स्थान्तरण के लिए गिड़गिड़ाए या व कुछ,,,,,,,करे परन्तु अब वो हो नही पा रहै है। त्रिवेंद्र जी ने एक ओर गैर राजनीतिक काम किया कि अपने कुछ अधिकार। विधायको को हस्तांतरित कर दिए जैसे पहिले परम्परा थी कि विधायक पहले अपने छेत्र में कोई बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम करे फिर मुख्यमंत्री की प्रसंशा में कसीदे पढे औऱ फिर योजनाओ की घोषणा करवाये या मुख्य मंत्री भीड़ देखकर गदगद हो सड़को पेयजल योजनाओ या अन्य योजनाओं की घोषणाये करे ।परन्तु अब ऐसा नही हो रहा है क्योंकि अब विधायको को कह दिया गया है कि तुम्हे ऐसा दिखावा करने की जरूरत नही है विधायक अपने हिस्से की सड़कों पेयजल योजनाओ को सीधे स्वीकृत कर सकते है। त्रिवेंद्र जी ने एक ऐसे चलन को भी खत्म कर दिया जहां कि पहिले मुख्यमंत्री की सभा में आने परही अधिकांश गरीब लोगो को विवेकाधीन कोष दिया जाता था परन्तु अब यह ब्यवस्था कर दिया कि सीधे विधायक से ही मिलकर यह मिल जाएगा।पहिले किसी वीमार ब्यक्ति के तीमारदार को मरीज के इलाज के लिए नेताओ स्वमसेवी संस्थाओ के आगे भीख मांगनी पड़ती थी परंतु मोदी जी कीआयुष्मान योजना का जो केवल निम्न गरीब लोगों के लिए है का विस्तार कर अटल आयुष्मान योजना लाकर मध्यम वर्ग सहित लगभग 95 प्रतिशत लोगो को इससे आच्छादित करने का काम त्रिवेंद्र सरकार ने किया जो योजना अकेले पूरे भारत मे अकेले उत्तराखंड में है।मेरे पास बताने को ऐसी कई योजनाए है जिन्हें में अगले चरण में बताऊंगा ।अभी तो में वो बाते बता रहा हूँ जो पूर्व परम्पराओ से हट कर है।जैसे अभी तक उत्तराखंड मे सन 1960 से भूमि बंदोबस्त जैसा अति महत्वपूर्ण कार्य करने की किसीने कोशिश नही की परन्तु ये साहसिक कदम उठाने का काम भी त्रिवेंद्र सरकार ने किया। गरीब किसान को एक लाख या उनके समूहों को बिना ब्याज ऋण देने का काम पूरे भारत मे अकेले उत्तराखंड सरकार ने किया है मेरे पास उत्कृष्ट मुख्य मंत्री बनने के अनेक तर्क है परंतु फिलहाल मेरे लिखने का उद्द्येश्य यह है कि कोई ब्यक्ति यदि अपना कार्य चुपचाप बिना किसी आडम्बर के करता है तो इसका मतलब यह नही है कि उसके पुरषार्थ की अवहेलना की जाय क्योकि यह चंद उपलब्धि ऐसे प्रदेश में है जहाँ 72 प्रतिशत धन राशि केवल नानप्लान यानी वेतन आदि पर खर्च होता है और जहाँ की जागरूकता कर्तब्यों पर कम अधिकारों पर ज्यादा ध्यान देती है क्रमशः,,,,,,,,शेष अगली कड़ी में

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