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उत्तराखंड : एक गलती सुधारने में लग गए 26 साल, DM ने ऐसे सुलझा दिया मामला

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देहरादून: राजधानी देहरादून में जमीनों की धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। कई मामले ऐसे हैं, जहां कर्मचारियों की गलती से किसी की जमीन के किसी दूसरे के नाम दर्ज हो गई है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। एनआरआइ को अपनी जमीन पर कब्जा पाने के लिए कई साल लग गए। उनको कई और साल ऐसे ही भटकते रहना पड़ सकता था, लेकिन डीएम डाॅ.आशीष कुमार श्रीवास्तव ने विभाग के कर्मचारियों की गलती को सुधार लिया।

दरअसल, एनआरआइ गौरव कुमार ने 1984 में ग्राम किशनपुर में 0.0820 हेक्टेयर भूमि खरीदी थी। जब भूमि का बंदोबस्त (सेटेलमेंट) किया गया तो पुराना खसरा नंबर 239, नया खसरा नंबर 142 ‘ख’ बन गया। इसके साथ ही बंदोबस्त विभाग के अधिकारियों ने इस भूमि को बंजर में दर्ज कर दिया। इसी छोटी गलती से खसरा नंबर में राजकीय इंटर कॉलेज की भूमि को गौरव कुमार की भूमि बताया दिखा दिया गया। जबकि कॉलेज की भूमि पर नगर निगम की है। इसको देखते हुए निगम ने मामले में आपत्ति दर्ज करा दी।

काफी सालों के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और कोर्ट के आदेश पर 2009 में जांच टीम गठित की गई। जांच में बंदोबस्त विभाग की गलती पकड़ी गई। उससे साफ हो गया कि नगर निगम और गौरव कुमार की भूमि अलग-अलग हैं। गौरव लगातार जमीन पर कब्जे की मांग करते आए। अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते रहे। लेकिन, कोई लाभ नहीं हुआ।

तब से लेकर अब तक सात डीएम बदल चुके हैं। लेकिन, आज तक विवाद का समाधान नहीं हुआ। मौजूदा डीएम डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने सभी दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर मामले का समाधान कर दिया है। एनआरआई गौरव कुमार को अपनी जमीन हासिल करने के लिए पूरे 26 साल लगा दिए।

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