गजब अधिकारी! इतनी तैयारी कि कुछ तय ही नहीं कर पाए?

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उत्तराखंड में दो साल के बाद शुरु हुई चार धाम यात्रा इस बार भगवान भरोसे ही चलने वाली है। 3 मई से यात्रा शुरु हो चुकी है लेकिन सरकार में बैठे जिम्मेदार अधिकारी अब तक यात्रा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले नहीं ले पाए हैं। हालात ये हैं कि पूरी यात्रा राम भरोसे चलने वाली है।

संख्या को लेकर असमंजस

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या के निर्धारण को लेकर स्थिती साफ नहीं हो पा रही है। हालात ये हैं कि मुख्यमंत्री कुछ कहते हैं और उनके कैबिनेट सहयोगी कुछ और। सीएम ने गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के दौरान भी दोहराया कि राज्य के सभी धामों में एक दिन में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर कोई पाबंदी नहीं। हालांकि वहीं राज्य के पर्यटन मंत्री कुछ और ही बात कहते सुने जा रहें हैं। उनकी माने तो एक दिन में निर्धारित संख्या में ही श्रद्धालुओं को दर्शन मिल पाएगा। अब सवाल ये है कि इसकी तैयारी पहले क्यों नहीं की गई?

किराए को लेकर कन्फ्यूजन

चार धाम यात्रा के दौरान यात्रा का किराया कितना होगा इसे लेकर भी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। हालात ये हैं कि विभाग अभी तक यात्रा मार्ग पर चलने वाले वाहनों का किराया तय नहीं कर पाया है। इससे असमंजस की स्थिती बनी हुई है। ट्रैवल कारोबारी यात्रा मार्ग पर किराया बढ़ाने की मांग कर रहें हैं।

कोविड का क्या

कोविड से बचाव को लेकर क्या एक्शन प्लान रहेगा ये समझ से परे है। एक तरफ सरकार कहती है कि यात्रा के लिए कोविड निगेटिव की रिपोर्ट दिखानी जरूरी नहीं है लेकिन वो ये अपील भी कर रही है कि चार धाम यात्रा के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें। मास्क लगाने की अपील की जा रही है। इस बीच उत्तराखंड में कोविड मामले बढ़ रहें हैं।

फोकस सिर्फ केदारनाथ पर

सरकार और अधिकारियों का फोकस अधिकतर केदारनाथ पर ही रहता है। चूंकि केदारनाथ में पीएम नरेंद्र मोदी की अधिक आस्था है लिहाजा अधिकारी और सरकार वहां की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में अपना अधिक समय बिताती है। गंगोत्री और यमुनोत्री को लेकर अधिकारी और सरकार तुलनात्मक रूप से उतनी चुस्ती नहीं दिखाते हैं। यही वजह है कि इन धामों में यात्रियों को मिलने वाली सहूलियतों में हमेशा कमी बनी रहती है। यात्रा के पहले ही दिन यमुनोत्री दर्शन को निकले तीन यात्रियों की मौत की खबरें सामने आईं। यूपी के सिद्धार्थ नगर निवासी अनुरुद्ध प्रसाद जायसवाल (65) की मौत यमुनोत्री मंदिर के पुल के पास, राजस्थान के डूंगरपुर निवासी कैलाश चौबीसा (63) की मौत भैरव मंदिर के पास मप्र के जबलपुर निवासी शकुन परिहार (63) की मौत भनियालीगाड़ के पास हुई।

ऐसे में सरकार से सवाल पूछा जाना चाहिए कि इन धामों में स्वास्थ व्यवस्था क्यों बेहतर नहीं की गई? क्यों शारीरिक रूप से असक्षम लोगों को इस यात्रा की अनुमति दी गई। क्यों नहीं यात्रा मार्ग पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई?

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