
उपनल कर्मचारियों का नियमितीकरण न होने से नाराज कर्मियों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। धरनास्थल पर महेश चंद्र भट्ट और योगेश बडोनी का क्रमिक अनशन दूसरे दिन भी चलता रहा। कर्मचारियों ने कैबिनेट की उप समिति पर भरोसा जताने से इनकार करते हुए धरना जारी रखने का निर्णय लिया है।
कर्मचारियों को बरगलाने का हो रहा काम: संयोजक
उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने कहा कि सरकार सालों से समितियां बनाकर कर्मचारियों को बरगलाने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि आठ महीने पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति आज तक कर्मचारियों का आंकड़ा तक नहीं जुटा पाई। ऐसे में कैबिनेट की नई उप समिति से किसी ठोस परिणाम की उम्मीद करना बेमानी है।
प्रदेश संयोजक हरीश कोठारी का कहना है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नियमितीकरण और समान कार्य समान वेतन का आदेश दिया था। इसके खिलाफ तत्कालीन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की थी, जिसे 2024 में SC ने खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेशों को बरकरार रखा। इसके बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे कर्मचारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
उपनलकर्मियों के भविष्य के लिए गंभीर नहीं है सरकार
महासंघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट ने कहा कि उपनल कर्मचारी पिछले 15 से 20 सालों से अल्प वेतन में पूरी निष्ठा के साथ सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके सुरक्षित भविष्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं दिखती।
उपनलकर्मियों का कहना है कि सरकार के ‘तीन साल बेमिसाल’ कार्यक्रम में सीएम धामी ने खुले मंच से उपनल कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं किया गया। जब तक ठोस निर्णय नहीं होता, धरना जारी रहेगा।
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