त्रिवेंद्र सरकार ने पूरी की वर्षों पुरानी मांग, अब मिलेगा ये बड़ा फाएदा

राज्य की त्रिवेंद्र रावत सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद जनता का वर्षों वर्ष पुराना सपना पूरा होने जा रहा है। आम आदमी से जुडे जिस प्रस्ताव को मंजूरी मिली है उससे विपक्ष में बैठी कांग्रेस की आगामी चुनाव के मद्देनजर चिंता बढ़ना भी लाजमी है। आम आदमी के घर का सपना राज्य सरकार पूरा करने जा रही है। अब आम आदमी को नौकरशाही से लेकर बाबुओं के चक्कर लगाने के झंझट से मुक्ति मिल सकेगी। राज्य सरकार इसके लिये उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि अध्य़ादेश मे एक बडा संशोधन लाने जा रही है। इससे राज्य में रह रहे लाखों लोगों को बहुत बडा फायदा होगा।

उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि अध्य़ादेश मे एक बडा संशोधन लाने जा रही है। राज्य सरकार अधिनियम की धारा 143 में संशोधन के लिये अध्यादेश के जरिये 143 ख की व्यवस्था करने जा रही है। मौजूदा समय में एक्ट का अध्धयन करें तो ऐसी कोई धारा नहीं है राज्य की त्रिवेंद्र सरकार का जनता को ये बहुत बड़ा तोहफा होगा। वर्ष 1950 में खेती की जमीन बचाने के लिये ये व्यवस्था की गई थी लेकिन समय समय पर लोगों की जरूरतों को देख प्रक्रिया 143 भी होती रही है। इस प्रक्रिया के तहत जो अपनी भूमि पर कृषि व कृषि संबंधी गतिविधियाँ नहीं करते हैं उनकी जमीन को 143 के तहत अकृषक मान कर अन्य कार्यों के लिये मंजूरी मिल जाती है। इसे एक प्रकार का भू उपयोग परिवर्तन ही माना जाता है। प्रक्रिया जटिल होने के साथ ही इसमें कई बार लेनदेन की शिकायतें भी आती रही है। साथ ही पटवारी से लेकर अफसरों के नखरों से लोगों को बडी परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है।

सरकार को कई बार अलग अलग स्तर पर ऐसी जानकारियां मिली की लोग अपनी ही खेती की जमीन पर जो कि बंजर हो चुकी या कृषि नहीं हो रही है वहाँ उद्योग आदि भी नहीम स्थापित कर पा रहे हैम। अब नई व्यवस्था के तहत महायोजना वाले क्षेत्रो में लोगों को भूमि उपयोग परिवर्तन या 143 नहीम कराना होगा। सरकार को निर्धारित राजस्व देकर ही भू उपयोग बदला जायेगा। राज्य सरकार के वित्त व न्याय ने इसकी मंजूरी दे दी है। सरकार की गंभीरता इस मसले पर इससे भी दिखती है।इसके साथ साथ सरकार ने वर्ग 4 की जमीनों के नियमतिकरण की दिशा में कदम आगे बढा दिये है। जौनसार बावर क्षेत्र को भी इसकी मंजूरी मिल गई है। वर्ग 3 की जमीनों की दिशा में भी कैबिनेट की उपसमिति की बैठकें शुरु हो गई हैं।

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