जो घाटी कभी बंद थी, कल हो जाएगी सैलानियों से गुलजार

नेलांग घाटीउत्तरकाशी – 27 सितंबर को पुरी दुनियां विश्व पर्यटन दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनाएगी। विश्व पर्यटन दिवस को खास बनाने के लिए उत्तराखंड़ पर्यटन विभाग सैलानियों को भारत-चीन सीमा की सैर कराएगा। दो दिवसीय इस भ्रमण कार्यक्रम में 150 पर्यटक नेलांग घाटी की खूबसूरत वादियों का दीदार करगें। गौरतलब है कि 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद इस क्षेत्र को बाहरी लोगों के लिए प्रतिबंन्धित कर दिया गया था। लेकिन सैलानियों की मांग को देखते हुए साल 2014 में प्रशासन और गंगोत्री नेशनल पार्क की पहल पर घाटी को सैलानियों के लिए खोला गया। उत्तरकाशी से 117 किलोमीटर दूर नेलांग घाटी की यात्रा रोमांच से भरपूर है।हालांकि भारत-चीन युद्ध से पहले नेलांग घाटी से तिब्बत के साथ व्यापार होता था। खड़ी चट्टानों पर बने पैदल मार्गों को देखकर महसूस होता है कि वो व्यापारी कितने साहसी रहे होंगे जो इतने खतरनाक रास्तों से व्यापार किया करते थे।समुद्र तल से साढ़े तीन से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित ट्रांस हिमालय की खड़ी चट्टानें, नदियां व झील पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी केएस नेगी की माने तो नेलांग घाटी में प्रकृति का अनमोल खजाना है, लेकिन प्रचार प्रसार न होने के कारण लोगों को इसके बारे में पता नहीं है। इसीलिए इस भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन कर एक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नेलांग में करीब 40 पर्यटकों के लिए 27 सितंबर को रात्रि विश्राम की व्यवस्था भी की गई है। जबकि शेष 110 को भैरवघाटी, गंगोत्री और हर्षिल में ठहराया जाएगा। दूसरे दिन सैलानियों को जादूंग गांव की सैर करायी जाएगी। इस भ्रमण कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा भी शिरकत करेंगे। सामरिक दृष्टि से अहम माने जानी वाली नेलांग घाटी में जाने के लिए प्रशासन व गंगोत्री नेशनल पार्क से अनुमति लेनी पड़ती है। नेलांग तक के सफर के लिए भारतीयों से प्रति व्यक्ति 150 रुपये बतौर शुल्क लिया जाता है। जबकि सरहद पर सटे होने के चलते विदेशी सैलानियों को यहां जाने की इजाजत नहीं दी जाती।

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