रैपिड एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने वालों को कराना होगा RT-PCR टेस्ट, ये है कारण

नई दिल्ली : कोरोना को लेकर रोजाना नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। इससे सरकार की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। हर दिन कोई न कोई नई बात खुलकर सामने आ रही है। एक दिन में एक लाख के करीब मामले सामने आने लगे हैं तो सरकार ने फैसला किया है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने वाले संदिग्ध मरीजों का दोबारा अनिवार्य रूप से आरटी-पीसीआर टेस्ट करें। इससे जांच रिपोर्ट केवल 20 मिनट में आ जाती है लेकिन, आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट आने में 12 से 24 घंटे तक का वक्त लग जाता है। रैपिड एंटीजन टेस्ट से अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इसकी विश्वसनीयता लगभग 90% मानी गयी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखी। चिट्ठी में सभी राज्यों को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट से निगेटिव आने वाले लक्षण वाले लोगों का अनिवार्य रूप से आरटी-पीसीआर टेस्ट करें। अभी तक एंटीजन टेस्ट में निगेटिव पाए जाने के मरीज को निगेटिव मान लिया जाता था। लेकिन, एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव टेस्ट पाए जाने पर आरटी-पीसीआर टेस्ट के माध्यम से कोरोना वायरस की पुष्टि की जाती थी। अब रैपिड एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने के बाद उनकी दोबारा जांच की जाएगी।

सरकार ने कोरोना संक्रमितों का पता लगाने के लिए रैपिड एंटीजन  टेस्ट का सहारा लिया था। लेकिन, तभी कहा गया था कि अगर इसकी रिपोर्ट निगेटिव आती है तो उसकी विश्वसनीयता कम होगी जबकि अगर ये पॉजिटिव बताता है तो इसकी विश्वसनीयता 90 फीसदी है। अब सरकार ने यही दिमाग लगाया कि जिन लोगों में पिछले दिनों निगेटिव रिपोर्ट आई है उनका दोबारा से टेस्ट किया जाए क्योंकि बहुत संभावना है कि इनमें एक बड़ा तबका ऐसा निकले जोकि पॉजिटिव हो और वो कई लोगों को संक्रमित कर रहा हो

आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार रैपिड एंटीजन टेस्ट में संक्रमण मुक्त पाए गए लक्षण वाले सभी मामलों और आरएटी में ही संक्रमणमुक्त पाए गए ऐसे लक्षणरहित मामले, जिनमें जांच के दो या तीन दिन बाद लक्षण आने लगते हैं। उनकी आरटी-पीसीआर के जरिए दोबारा जांच करवाना आवश्यक है। मंत्रालय ने कहा कि इससे जिन मामलों में संक्रमणमुक्त होने संबंधी पुष्टि गलत है, उनका समय रहते पता चलने से आइसोलेशन किया जा सकेगा और अस्पताल में भर्ती करवाया जा सकेगा।

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