चीनी राखियां इस बार नहीं हुई बाजार पर हावी

rakhiनैनीताल– राखी का त्यौहार बाजार के लिहाज से इस बार अलग होगा। याद कीजिये गुजरे वक्त के राखी के त्यौहार को,जब बाजार चीनी राखियों की चमक से चौंधियाया हुआ रहता था। इस बार ऐसा कम ही देखने को मिल रहा है। नैनीताल जिले के रामनगर बाजार मे तो चीनी राखियों को कोई पूछ भी नही रहा है। आलम ये है कि बहिनों को भाईयों की कलाई पर बांधने के लिये चीन की राखियों के बजाय भारतीय कारीगरों की राखियां भा रही हैं। ये राखियां सूरत, कोलकता और मुंबई मे बनी हैं। भारतीय रंग और रेशे से बनी इन राखियों मे बच्चों को लुभाने वाले कार्टून जड़ी राखियां भी शामिल हैं।

वैसे देखा जाये ते जब से चीनी सामान भारतीय बाजार मे सुलभ हुआ है उसने भारतीय दस्तकारी की कमर तोड़ कर रख दी थी। चीनी समान चले या न चले उसकी चमक और दाम भारतीय उपभोक्ता के सिर आंखों पर बैठते हैं।  हर त्यौहार मे चीनी सामान बाजार में भारतीय सामान को पछाड़ता दिखता था। लेकिन लगता है बदलाव की शुरूआत हो चुकी है। बेशक स्वदेशी अपनाने की ये पहल छोटे बाजार से शुरू हुई है लेकिन उम्मीद की जा सकती है कि ये विस्तार करेगी और बड़ा बदलाव लाने मे कामयाब होगी।

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