फुटपाथ पर हाॅकी की नई पौध तैयार करने को मजबूर ये पूर्व गोलकीपर, उत्तराखंड से ख़ास नाता

मध्यप्रदेश: उत्तराखंड मूल के पूर्व हाॅकी गोलकीपर इन दिनों मध्य प्रदेश के इंदौर में हाॅकी की नई पौध तैयार कर रहे हैं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि इसके लिए उनके पास कोई ग्राउंड नहीं हैं। मजबूरत उनको फुटपाथ पर ही नए खिलाड़ियों को हाॅकी का ककहरा सिखाना पड़ रहा है। 2007 में आई शाहरुख खान अभिनित फिल्म चक दे इंडिया से नयी ख्याति पाने वाले देश के पूर्व गोलकीपर मीररंजन नेगी अपने इंदौर में हॉकी की नयी पौध को फुटपाथ पर खेल के गुर सिखाने को मजबूर हैं।

इसकी वजह यह है कि मध्य भारत में हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले जिस 80 साल पुराने प्रकाश हॉकी क्लब में नेगी ने खेल का ककहरा सीखा, उसके मैदान की जगह पर स्थानीय निकाय ने कचरा निपटान संयंत्र बना दिया है। इसके अलावा, शहर लम्बे समय से एक अदद एस्ट्रो टर्फ मैदान को तरस रहा है। नेगी ने रविवार को PTI-भाषा को बताया कि हम रेसिडेंसी क्षेत्र में जिला जेल की दीवार से लगे फुटपाथ और इसके पास की खाली सड़क पर हॉकी के करीब 125 नये खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। ज्यादातर बच्चे गरीब परिवारों के हैं।

उन्होंने बताया कि हॉकी के ये उभरते खिलाड़ी रेसिडेंसी क्षेत्र में वर्ष 1940 में स्थापित प्रकाश हॉकी क्लब से जुड़े हैं। इस क्लब का मैदान अधिग्रहित कर इंदौर नगर निगम (IMC) ने कचरा निपटान संयंत्र बना दिया है और क्लब को इसके बदले नयी जगह अब तक नहीं मिल सकी है। हॉकी को लेकर सरकारी उपेक्षा पर नाराज नेगी ने कहा, तवज्जो बस क्रिकेट को दी जा रही है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इंदौर जैसे बड़े शहर में हॉकी का एक भी एस्ट्रो टर्फ मैदान नहीं है।

उन्होंने सुझाया कि प्रदेश सरकार को शहर के खंडवा रोड पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के परिसर में हॉकी का एस्ट्रो टर्फ मैदान बनाने के लिये जगह देनी चाहिये। नेगी ने कहा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान से हमारा निवेदन है कि वह इंदौर में जल्द से जल्द एस्ट्रो टर्फ मैदान बनवायें। शहर में हॉकी को दोबारा जिंदा करने के लिये यह मैदान बेहद जरूरी है। मीररंजन नेगी मूल रूप से अल्मोड़ा के रहने वाले हैं।

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