‘मटर’ ने बदल दी उत्तराखंड के इन गांवों की किस्मत, सीएम भी हुए मुरीद

उत्तराखंड के चमोली का एक गांव अब एक नई पहचान के साथ समूचे राज्य के सामने उदाहरण बन कर उभरा है। इस गांव का नाम है घेस। उत्तराखंड के इस दूरस्थ सीमांत गांव तक पहुंचने के खासी मशक्कत करनी पड़ती है। सर्दियों और हिमपात के दौरान तो यहां पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में घेस में बदलाव की उम्मीद बेमानी सी लगती थी लेकिन फिलहाल ये गांव पूरे उत्तराखंड में चर्चा में है।

घेस के चर्चा में होने के पीछे यहां के किसानों के जरिए अपनाया गया किसानी का मॉडल है। पारंपरिक खेती छोड़ कर घेस के किसानों ने मटर की खेती को अपनाया। उन्हें मटर की खेती के लिए पप्पू भाई ने प्रेरित किया। खेती में नए प्रयोग करने के शौकीन पप्पू भाई ने इलाके के किसानों को विदेशों से लाकर अच्छी प्रजाति के बीज उपलब्ध कराए। इन बीजों से पैदा हुई फसल ने किसानों के चेहरे पर वो खुशी ला दी जो उन्होंने कभी सोची भी नहीं थी। धीरे धीरे मटर की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ती गई। घेस के साथ हिमणी गांव में भी किसान आगे आए। फिलहाल साढ़े चार सौ किसान मटर की खेती कर रहें हैं। मटर की खेती से किसानों की आय में कई गुना का इजाफा हो गया है।

घेस और हिमणी की जलवायु और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रख कर अपनाए गए खेती के मॉडल से पप्पू भाई ने किसानों कि किस्मत बदल दी। अब न कोई किसान गांव छोड़ कर शहर जाना चाहता और न ही उसे आजीविका की कोई चिंता है। यही नहीं, पप्पू भाई अब इन गांवों में सेब के बगीचे भी तैयार करा रहें हैं। सब कुछ ठीक रहा तो कुछ सालों में आपको घेस के सेब का स्वाद भी मिल सकेगा।

सीएम त्रिवेंद्र रावत की कोशिशों से अब इस गांव तक बिजली भी पहुंच गई है। मोबाइल कनेक्टिविटी की सुविधा में सुधार हो रहा है। गांव में धरातल पर हुए बदलाव ने सीएम को भी खुश कर दिया है। यही वजह है कि सीएम अपने अब तक के कार्यकाल में दो बार इस गांव का दौरा कर चुके हैं।

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