संयुक्त राष्ट्र में सेवाएं देंगे उत्तराखंड के ये IAS अफसर, CM को भी देते रहेंगे सलाह

देहरादून : बेहतरीन आईएएस अफसरों में से एक उत्तराखंड कैडर के डॉ. राकेश कुमार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा को अलविदा कह दिया है। डॉ. कुमार इस समय यूएनडीपी (यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम) में भारत में मुख्य सलाहकार के पद पर कार्यरत है। आईएएस की नौकरी से वीआरएस लेने की उनकी अर्जी को मुख्यमंत्री ने मंजूर तो कर लिया है, लेकिन साथ ही डॉ. कुमार को उत्तराखंड में अपना सलाहकार भी नियुक किया है। अब वह 65 वर्ष की आयु तक संयुक्त राष्ट्र में सेवाएं दे सकेंगे।

उत्तराखंड कैडर के 1992 बैच के आईएएस अफसर डॉ राकेश कुमार ने अपना प्रतिनियुक्ति का समय बढ़ाने का आवेदन किया था, उत्तराखंड सरकार ने तो अनुमति दे दी थी लेकिन केंद्र से स्वीकृति मिलने में हो रहे विलम्ब के चलते कुमार को फैसला लेना था कि वो या तो वीआरएस लेकर पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र के साथ जाय या फिर लौटकर अपने कैडर उत्तराखंड आये। इस क़शमक़श में उन्होंने वीआरएस लेकर यूएन के साथ जाने का फैसला लिया। 31 जनवरी को यूएन द्वारा दी गयी समयावधि खत्म होने और भारत सरकार की मंजूरी नहीं मिलने के बाद डॉ कुमार ने आईएएस की नौकरी से वीआरएस लेने के लिए उत्तराखंड सरकार समक्ष आवेदन किया। जिसे विगत 11 फरवरी को मुख्यमंत्री ने मंजूर तो किया ही लेकिन राज्य के लिए डॉ कुमार का उपयोग करने के लिए उन्हें अपना सलाहकार भी नियुक्त किया। उन्हें ऑनरेरी एडवाइजर नियुक्त किया गया है ताकि संयुक्त राष्ट्र को भी कोई आपत्ति न हो। इस तरह, सेवा निवृति से पांच वर्ष पहले ही एक ऐसे आईएएस ने देश की इस सुप्रीम सर्विस को छोड़ दिया जो कि खुद शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के मालिक रहे है।

पौड़ी, नैनीताल व देहरादून में जिलाधिकारी रहते हुए और शासन में खासतौर पर शिक्षा व आपदा प्रबंधन सचिव रहते हुए जो काम उन्होंने किये, उनका जिक्र आज भी होता है। पिछले वर्ष डॉ कुमार को London School of Hygiene and Tropical Medicine ने “ग्लोबल हेल्थ लीडरशिप प्रोग्राम” के लिए चुना। खास बात उनका चयनित होना नहीं, बल्कि इसकी ख़ासियत यह है कि वर्ल्ड के इस सर्वोच्च संस्थान ने पूरी दुनिया से जिन बारह हस्तियों को चुना उनमे राकेश कुमार एक थे। यहाँ के निदेशक Prof. Peter Piot है जिन्होंने 1976 में इबोला की ख़ोज की थी, जो इस समय UNAIDS के कार्यकारी निदेशक भी है। डॉ कुमार ने इस कार्यक्रम के तहत लन्दन, जिनेवा और कैप टाउन में “ग्लोबल हेल्थ लीडरशिप प्रोग्राम” की ट्रेनिंग ली। 2015 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहते हुए देश भर में टीकाकरण से छूटे बच्चों के लिए मिशन इंद्रधनुष जैसी महत्वाकांक्षी योजना लांच की, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री अक्सर अपने सम्बोधन में करते रहे है। यह विश्व में पब्लिक हेल्थ की 12 सर्वाधिक सफल और बड़ी योजनाओं में से एक है।

(वरिष्ठ पत्रकार अजीत राठी के ब्लॉग से साभार)

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