उत्तराखंड : पहले से थी पूरी जानकारी, फिर क्यों नहीं की व्यवस्था, अब उठ रहे सवाल

देहरादून: कोरोना के कारण चारधाम यात्रा पूरे दो साल बाद हो रही है। लंबे वक्त के बाद शुरू हुई चारधाम यात्रा संचालन को लेकर सरकार ने बड़े दावे तो किए। लेकिन, सरकार के दावों को अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। चारधाम यात्रा में सरकार को इस बात की पहले से ही जानकारी थी कि इस बार यात्री बड़ी संख्या में आएंगे। यात्रा शुरू होने से पहले ही करीब दो लाख लोग चारधाम यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके थे।

अब तक करीब दो लाख श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। यात्रा का संचालन वैसे तो हरिद्वार और ऋषिकेश से ही होता है, लेकिन यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए देहरादून से भी संचालन शुरू किया जा सकता था। चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को जरूरी औपचारिकताएं पूरा करने के लिए ऋषिकेश ही जाना पड़ता है। ऐसे में अगर देहरादून से भी संचालन किया जाता तो, यात्रियों को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता।

इतना ही नहीं चार धाम यात्रा के लिए जा बसों की कमी नजर आ रही है तो वहीं अधिकतर बसें आईएसबीटी बस अड्डे में खड़ी होकर धूल फांक रही है। अब ऐसे में सवाल उठता है जब चार धाम की यात्रा का सीजन शुरू हो गया हो तो प्रदेश का परिवहन निगम विभाग कहां सो रहा है।

आखिरकार राजधानी में चार धाम यात्रा को लेकर कंट्रोल रूम क्यों नहीं बनाए गए। ऐसी स्थिति में चार धाम यात्रा के लिए प्राइवेट तौर पर प्रीपेड टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है लेकिन सवाल यह उठता है परिवहन विभाग ने देहरादून में चारधाम यात्रियों के लिए बसों का संचालन क्यों नहीं किया।

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